फ्री का चन्दन…बिजली बिल माफ़ी योजना

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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राजा या मुखिया अधिकतर सिरफिरे और उलटे दिमाग के होते हैं। कारण वे जन्मजात राजकुमार से राजा के मरने के बाद राजा बन जाते हैं और उनको जन्मजात राजशाही गुणों का अकूत भण्डार होने से उनके आदेश भी बहुत लाभकारी होते हैं। जैसे गांव में धुआं मत करो,कारण राजा साहब की आँखें आई हैं,शहर में धूल नहीं होना चाहिए कारण राजा को धूल से एलर्जी हैं,इसीलिए सड़कों पर से जनता न निकले या सड़कें रबर की बनवाई जाए। एक सेठ जब मरने लगा तब उसने अपने एकमात्र होनहार पुत्र को कहा-बेटा,घर से दुकान ठन्डे- ठन्डे जाया करो,और व्यापार में बरकत करना। सेठ के मरने के बाद बेटे ने घर से दुकान तक धूप से बचने के लिए लोहे की चादर का शेड बनवाया और रुपए का माल पंद्रह आने में बेच दिया।
यदि किसी को नाकारा-निठल्ला-आलसी बनाना हो तो उसे कोई काम नहीं करने दो। उसे बिना काम का रहने दो,आरामतलब बना दो,उसके मन-

मस्तिष्क में,शरीर में जंग लग जाएगी और वह आगे चलकर निकम्मा और परजीवी हो जाएगा। कर्मशील को कर्महीन बनाना हो,तो उसे कर्मरहित बनादो। उसको इतना दे दो कि  वो भी भूखा न रहे और न उसके यहाँ से कोई भी साधु भी भूखा न जाए। आज सामान्य मध्यम वर्ग काम करते-करते मरा जा रहा है,उसके ऊपर कई प्रकार के कर लदे हुए हैं,और वह यदि नौकरी पेशा है तो १२ माह नौकरी करने पर १० माह का वेतन मिलता है। उसके बाद हवा भर का पैसा अभी नहीं लग रहा है,बाकी जल, बिजली से लेकर सब पर भरपूर कर दे रहा है। इसके बाद भी वह अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। वह अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई,दवाई आदि मुश्किल से कर पा रहा है तो दूसरी तरफ सरकार ‘हरामखोरी तेरा सहारा’ संस्कृति को बढ़ावा दे रही है।
‘मनपसंद सरकार’ जिसे मध्यप्रदेश सरकार कहते हैं,उसने हरिजन,आदिवासी,गरीबों के लिए अपना खजाना खोलकर रख दिया है। जी हाँ, यहाँ एक तरफ ओवरड्राफ्ट पर सरकार चल रही है,और दूसरी तरफ दिन-रात नित-नए कार्यक्रम में खजाना खोला जा रहा है। जैसे लड़इय्या की मौत आती है,तब वह शहर की ओर भागता है। ऐसा लग रहा है कि शिवराज की सरकार जाने वाली हैतो मुक्त हस्त से खूब बांटों,और फिर दूसरी सरकार आएगी तब उसकी दशा वैसी होगी-जैसे विधवा और ऊपर से गर्भवती। उसकी-राम तेरी गंगा मैली हो गई,पापियों का पाप धोते-धोते वाली स्थिति होगी।
रोटी,कपड़ा और मकान मुफ़्त देने जैसे दाम में  या नि:शुल्क में दे रहे हैं,सब सुविधाएं किसकी बदौलत ?हम जनता के करों पर आप वाहवाही लूट रहे। आपने अपनी निजी कमाई से कितना दान दिया ? क्यों हमारी कमाई को इस तरह बर्बाद किया जा रहा हैं ? चुनी हुई सरकार को इस बेरहमी से धन का दुरुपयोग करने का अधिकार किसने दिया ? यदि हमारे द्वारा बिना नागा-चूक के बिजली का बिल भरा जाता है तो क्या हमें कुछ छूट मिलेगी ? हमारे धन पर उन गरीबों को और निकम्मा-कामचोर बना रहे हैं और उनकी छूट से उनको लाभ देने वाले अपनी गरीबी दूर कर रहे हैं,जिसमें आप भी हो सकते हैं। मात्र मतों की  खातिर इतना बड़ा फरेब मध्यम वर्ग से किया जा रहा है। कब तक यह सिलसिला चलेगा! आपने उन गरीबों को अपाहिज बना दिया है। उनको मुफ़्त की चाहत ने निकम्मा बना दिया। उनको स्वावलम्बित न बनाकर परजीवी बना दिया और अब उनसे कोई काम नहीं होता है। मात्र सरकारी सुविधा का दुरूपयोग,शराब पीने और मुफ़्त का अन्न मिलने पर वहीं का वहीं बेच देना इसमें शामिल है,इसलिए कर्महीन कोई फल नहीं पाते हैं।
यह निठल्ले बनाने की योजना है,जिससे उनको नरभक्षी जैसे शेर जैसा बना दिया जाए। हराम की आदत लगने से सब पराधीन होते जा रहे हैं। जैसे अफीम का नशा धीरे-धीरे अफीमची बना देता हैं ? कितना सुख दोगे,उनमें अब काम करने के संस्कार नहीं रहे। कारण जन्म से लेकर मर्त्यु तक की व्यवस्था सरकार मतों की खातिर कर रही हैं,वह भी जनता के पैसों पर। मुख्यमंत्री को इस तरह खजाना खोलने का अधिकार नहीं है। यदि उनको दो तो ऐसी छूट तो नियमित बिल जमा करने वालों को भी मिलना चाहिए। सामान्य वर्ग तीन-तीन वर्गों का लालन:पालन करे ? क्यों करे ? सत्तर साल के बाद भी उनको सहारा दें,कितनी पीढ़ी उनको पालेगी।
                  उनको मेहनत,मजदूरी, व्यवसाय के अवसर दें और अब बहुत हो चुका,उनकी गरीबी मिटना नहीं हैं। कारण उनको जब मुफ्त का मिल रहा है,तो उसमें जो बुराइयां पैदा की जा रही हैं,शराबी,कबाबी के साथ निष्क्रिय भूमिका समाज के लिए है,जबकि समाज जी-जान से उनको खड़ा करके दौड़ाने का प्रयास कर रहा है। जो असंभव है, कितने आए और कितने आकर चले गए पर वो नहीं सुधरेंगे।
मनपसंद सरकार आप अपनी ‘वोट बैंक’ के कारण जनता के धन का दुरूपयोग बंद करें और नहीं तो हम लोग जो समय पर कर,बिल जमा करते हैं,उनमें हमको भी छूट दी जाए। हम लोग अब अन्यों का लालन- पालन करने में असमर्थ हैं। शिवराज जी,अब ‘फ्री का चन्दन घिस मेरे नंदन,बंद कीजिए। आप उनके निकम्मेपन के लिए पाप के भागीदार बनोगे,वे कभी आपको माफ़ नहीं करेंगे।
इसलिए,माननीय मुख्यमंत्री जी हमें ज़ोरदार नाम नहीं करना है,किन्तु ज़ोरदार काम करना है,और आप इनको धीमा जहर दे-देकर नशाखोर बना रहे हैं। इन्हें अब स्वावलम्बन का पाठ पढ़ाओ,कब तक इनको पालेंगे- पोसेंगे। इनकी आगामी पीढ़ी किसी को माफ़ नहीं करेगी। कारण उनको वस्तु का मूल्य नहीं मालूम होने से वे वस्तु भोगो का अवमूल्यन करेंगे।निश्चित,श्रम की प्रतिष्ठा को स्थापित कराएं,आलस्य मुक्त,परिश्रम मुक्त आय भी अन्याय और भ्रष्टाचार है।
परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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