बचपन की खुशबू

डॉ.सोना सिंह 
इंदौर(मध्यप्रदेश)
************************************************** 
पुरानी किताबों पर लगे कवर से,
कवर पर लगे स्टीकर से
कवर पर बनी तस्वीरों से,
किताबों के पन्नों
से निकली कोई रंगीन पन्नी,
कोई पंख,अगरबत्ती के पूड़े के खुशबूदार टुकड़े
से आती है,
बचपन की खुशबू।

किसी शाला की पुरानी इमारत से,
खाली बोर्ड पर फूल बनाने की होड़ से
बेंच पर दीवारों पर लिखें नामों से,
सीढ़ियों पर कूद-कूदकर उतरने से
बोतल को छलकाकर पानी पीने से,
आती है बचपन की खुशबू।

स्लेट पर पेम से लिखते
नन्हें हाथों से,
पेसिंल को छील-छीलकर
खत्म करने की शरारत से
पेन में स्याही भरने हुए
हाथों को काला-नीला करने से,
आती है बचपन की खुशबू।

बालों में रगड़कर तेल लगाती
ममता के हाथों फिसलती जिद्दी से,

दूध पीने के विज्ञापनों में
माँ-पापा के तानों से,
आती है
बचपन की खुशबू।

आँगन में टप्पे खाती गेंद से,
अमरूद चुनने में होने वाली
मैं-मैं की दौड़ से
तली हुई पपड़ियों में
छांट-छांटकर खाने से,
दिनभर मटके के पास चक्कर लगाते
नमूनों को देखकर,
आती है बचपन की खुशबू॥

परिचय-डॉ.सोना सिंह का बसेरा मध्यप्रदेश के इंदौर में हैl संप्रति से आप देवी अहिल्या विश्वविद्यालय,इन्दौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में व्याख्याताके रूप में कार्यरत हैंl यहां विभागाध्यक्ष रही डॉ.सिंह की रचनाओं का इंदौर से दिल्ली तक की पत्रिकाओं एवं दैनिक पत्रों में समय-समय पर आलेख,कविता तथा शोध पत्रों के रूप में प्रकाशन हो चुका है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के भारतेन्दु हरिशचंद्र राष्ट्रीय पुरस्कार से आप सम्मानित (पुस्तक-विकास संचार एवं अवधारणाएँ) हैं। आपने यूनीसेफ के लिए पुस्तक `जिंदगी जिंदाबाद` का सम्पादन भी किया है। व्यवहारिक और प्रायोगिक पत्रकारिता की पक्षधर डॉ.सिंह के ४० से अधिक शोध पत्रों का प्रकाशन,२०० समीक्षा आलेख तथा ५ पुस्तकों का लेखन-प्रकाशन हुआ है। जीवन की अनुभूतियों सहित प्रेम,सौंदर्य को देखना,उन सभी को पाठकों तक पहुंचाना और अपने स्तर पर साहित्य और भाषा की सेवा करना ही आपकी लेखनी का उद्देश्य है।

Hits: 62

आपकी प्रतिक्रिया दें.