‘बत्ती गुल मीटर चालू’…आमजन के विषय का पोस्टमार्टम हो गया

इदरीस खत्री
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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फिल्म समीक्षा ……………..
निर्देशक नारायण सिंह वाली इस फिल्म में अदाकार- शाहिद,श्रद्धा कपूर,दिव्यांशु शर्मा,यामी गौतम हैं।
संगीत -अनु मलिक और रोचक कोहली का है।
सामाजिक विषय पर नारायण पहले ‘टॉयलेट-एक प्रेम कथा’ बना चुके है,लेकिन ईमानदार विषय के लिए केवल जज़्बा काम नहीं करता,इसके लिए कहानी,पटकथा, संगीत-कलाकारों की ईमानदारी भी लाजमी होती है,
लेकिन इस बार नारायण गच्चा खा गए। विषय भारतीयों के बेहद करीब है। बिजली बिलों में भारी छूट देकर मध्य प्रदेश सरकार ने अगले चुनाव की भरपाई कर ली है,और  पिछले सालों में कांग्रेस की डूबने की वजह भी यही रही थी तो यह विषय संजीदा होने के साथ आमजन के करीब ही है।
कहानी के मुताबिक उत्तराखण्ड के टिहरी गाँव में तीन दोस्त होते हैं-सुशील कुमार(शाहिद),ललिता(श्रद्धा) सुंदर मोहन(दिव्यांशु)। तीनों जिगरी दोस्त हैं। सुशील ने वकालत पास की है,ललित डिज़ाइनर है और सुंदर ने प्रिंटिंग प्रेस का काम शुरू किया है।
उत्तराखंड में बिजली की बड़ी समस्या है। ज्यादातर वक्त बिजली गुल ही रहती है,इसे लेकर अच्छा हास्य गढ़ने की कोशिश की गई है,लेकिन फ़िल्म से जुड़ पाना मुश्किल होता है।
सुंदर की प्रिंटिंग प्रेस का बिल हमेशा ज्यादा आता है। जब बिल ५४ लाख का आ जाता है और शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कोई हल नहीं निकलता,कोई सुनवाई नहीं होती है  तो सुंदर आत्महत्या कर लेता है। इससे सुशील और ललिता सदमे में आ जाते हैं।
ललिता,सुशील को प्रेरित करती है सुंदर का प्रकरण लड़ने के लिए। प्रकरण का फैसला क्या होता है,इसके लिए फ़िल्म देखनी पड़ेगी। फ़िल्म क्यों देखी जाए-
कलाकारों में तीनों ने बढ़िया अभिनय किया है। शाहिद,श्रद्धा,दिव्यांशु,यामी गौत का अभिनय अच्छा है।
लोकेशन ओर छायांकन अंशुमन महाले का अच्छा है।
कमजोर कड़ी में फ़िल्म की समय सीमा १६१ मिनट है, जो उबाऊ है।
फ़िल्म को लगभग ५० मिनट छोटा किया जा सकता था।
पटकथा विपुल रावल,समर्थ सिंह,गरिमा का कमजोर है, जिस कारण फ़िल्म पकड़ नहीं बना पाती है। निर्देशन भी कमजोर ही लगा है। इन्हीं कारणों से फ़िल्म औसत पर आकर टिक गई है,नहीं तो बेहतर हो सकती थी।
लगभग ४० करोड़ का बजट है फ़िल्म का।
२२०० सिनेमाघरों में प्रदर्शित की गई,तो ६ से ७ करोड़ की ओपनिंग मिल सकती है,लेकिन फ़िल्म के सामने
नवाज की मंटो,इश्केरिया,जेक और जिल सहित कुल ८ फिल्म प्रदर्शित हुई तो ओपनिंग पर असर पड़ सकता है।
फ़िल्म को ढाई सितारा देना ठीक होगा।
 परिचय इंदौर शहर के अभिनय जगत में १९९३ से सतत रंगकर्म में इदरीस खत्री सक्रिय हैं,इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग १३० नाटक और १००० से ज्यादा शो में काम किया है। देअविवि के नाट्य दल को बतौर निर्देशक ११ बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में देने के साथ ही लगभग ३५ कार्यशालाएं,१० लघु फिल्म और ३ हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। आप इसी शहर में ही रहकर अभिनय अकादमी संचालित करते हैं,जहाँ प्रशिक्षण देते हैं। करीब दस साल से एक नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं। फिलहाल श्री खत्री मुम्बई के एक प्रोडक्शन हाउस में अभिनय प्रशिक्षक हैंl आप टीवी धारावाहिकों तथा फ़िल्म लेखन में सक्रिय हैंl १९ लघु फिल्मों में अभिनय कर चुके श्री खत्री का निवास इसी शहर में हैl आप वर्तमान में एक दैनिक समाचार-पत्र एवं पोर्टल में फ़िल्म सम्पादक के रूप में कार्यरत हैंl 

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