बदलने लगी हूं मैं

सुषमा मलिक 
रोहतक (हरियाणा)

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हां,बस अब थोड़ा-सा बदलने लगी हूं मैं,
खुद से ही खुद के सांचे में ढलने लगी हूं मैं।

अपनेपन के झूठे एहसास से बुझा दिया
था मुझे उसने राख की मानिंद…
पर अब फिर से अपने कर्मपथ पर,
ज्वाला-सी जलने लगी हूं मैं।
हां,बस अब थोड़ा-सा बदलने लगी हूं मैं॥

मेरी हर आस हर उम्मीद को उसने,
अपने कदमों तले कुचल-सा दिया…
ठोकर इतनी जबरदस्त लगी कि,
पथरीले रास्तों पर हंसकर चलने लगी हूं मैं।
हां,बस अब थोड़ा-सा बदलने लगी हूँ मैं॥

उन चंद लोगों के इशारों तक रह गई है,
जिन महफ़िलों की रौनकें…
उन महफ़िलों को `मलिक` बहुत दूर से,
ही सलाम अब करने लगी हूँ मैं।
हां,बस अब थोड़ा-सा बदलने लगी हूं मैं॥

उतारकर पागलपन उसकी मोह माया का,
देख `सुषमा` उस हद वाला…
खुद से ही वो प्यार अब करने लगी हूं मैं।
हां,`मलिक` थोड़ा-सा बदलने लगी हूं मैं॥

परिचय : रोहतक निवासी सुषमा मलिक की जन्मतिथि-२३ अक्टूबर १९८१ तथा जन्म स्थान-रोहतक (हरियाणा)है। आपका निवास रोहतक स्थित शास्त्री नगर में है। एम.सी.ए. तक शिक्षित सुषमा मलिक का कार्यक्षेत्र विद्यालय में प्रयोगशाला सहायक और एक संस्थान में लेखापाल का है। आप सामाजिक क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रयोगशाला संघ की महिला प्रदेशाध्यक्ष हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और ग़ज़ल है। विविध अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं निरन्तर आती रहती हैं। उत्तर प्रदेश की प्रमुख साहित्यिक संस्था सहित अन्य संस्थाओं ने भी आपको सम्मानित किया है। आपकी दृष्टि से लेखन का उद्देश्य-अपनी आवाज से जनता को जागरूक करना है।

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