बदल गया आदमी 

अकबर खान 

उदयपुर(राजस्थान)

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बदल गया आदमी बदल गया समाज है,
बदल गया आदमी बदल गया  समाज है।
सूख गई नदियाँ सूख गए ग्लेशियर ताल-पोखरे,
बाज़ी सब हार गए,पिट गए सबमोहरे।
बाक़ी बच गया भय भूख कुंठा  संत्रास है,
बदल गया आदमी बदल गया  समाज है।
शब्द सब रीत गए,भाव भी टूट गए,
प्रेम नहीं बचता अब,मन के  गलियारे में।
कोई नहीं दिखलाई देता इस अँधियारे में,
बदल गया आदमी बदल गया समाज है॥
मंत्र-सब बेअसर हुआ,देवता भी रूठ गया,
भरे बाज़ार में ईश्वर भी लूट गया।
ऐसे में बंसी बजाए अब कौन,गीत सुनाए अब कौन,
बदल गया आदमी बदल गया समाज है॥
दिशाएँ सब मौन हैं,मंज़िल का अब पता नहीं,
दूर से ही दर्शन है,धर्म का प्रदर्शन है।
ऐसे में घंटा घड़ियाल बजाए अब कौन,
मंदिर में जाए तो अब जाए कौन॥
 परिचय-अकबर खान  को शायर अकबर खान कहलाना पसंद है। जन्म तिथि २ जुलाई १९८० एवं जन्म स्थान-बनारस है। वर्तमान पता उदयपुर स्थित  श्याम नगर(भुवाणा)है। राजस्थान का यही शहर उदयपुर आपका स्थाई निवास है। श्री खान ने कम्प्यूटर अभियंता सहित व्यापार प्रशासन में स्नातकोत्तर और व्यापार प्रबंधन में भी स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। आपका कार्यक्षेत्र-व्यवसाय है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप हिंदी शायरी को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर हिंदी कविता का आयोजन करवाते हैं। लेखन विधा-शेर,रचना और ग़ज़ल है। ब्लॉग पर भी लिखने वाले श्री खान की रचनाओं का   प्रकाशन पत्र-पत्रिकाओं में हुआ है। अकबर खान की लेखनी का उदेश्य-हिंदी भाषा में ग़ज़ल-गीत को बढ़ावा देना है। 

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