बन्द आँख से स्वप्न न देख

पारस गुप्ता  ‘शायर दिल से’ 
चन्दौसी(उत्तर प्रदेश)
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जो सोचा कभी,वही इत्तेफ़ाक हुआ…,
कैर में जला खूब,जल के राख हुआ…l

नूर में चाँद किसी हुस्न से कम नहीं…,
फिर बता क्यूँ महताब में दाग हुआ…l

कदूरतें पाल रखी जो अर्सों से तुमने…,
नीर के धोने से अर्न्तमन साफ़ हुआ…l

मोहब्बत की बसी बस्ती मिली नहीं…,
मिली मुहब्बत से भी तलाक हुआ…l

बन्द आँख से स्वप्न ना देख `पारस`…,
स्वप्न जो भी दिखा पूरा खाक हुआ…ll
(इक दृष्टि यहाँ भी:कैर-नफरत,कदूरतें-मन की गंदगी)

परिचय-पारस वार्ष्णेय का साहित्यिक उपनाम-पारस गुप्ता ‘शायर दिल से’ है। १९९४ में ६ दिसम्बर को चन्दौसी (सम्भल) में जन्मे हैं। वर्तमान में चन्दौसी (सम्भल)में ही बसेरा है। शहर चन्दौसी(उत्तर प्रदेश) निवासी श्री वार्ष्णेय की शिक्षा बीएससी एवं एमएससी (गणित)है। आपका कार्यक्षेत्र अध्यापक (गणित)का है। इनकी लेखन विधा- ग़ज़ल,गीत,मुक्त,मुक्तक आदि है। कुछ सम्मान भी प्राप्त किए हैं। विशेष उपलब्धि में आई.आई.टी. की परीक्षा तथा अन्य कई परीक्षा उत्तीर्ण करना है। लेखनी का उद्देश्य-शौक पूरा करना तथा हर दिल पर राज करना  है। आपकी विशेषज्ञता-हिन्दी ग़ज़ल को तरन्नुम में लिखने की है। 

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