बहुत बुरा है हाल

संजीव शुक्ल ‘सचिन’ 
पश्चिमी चम्पारण(बिहार)
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दर्पण अब झूठा लगे,मन में उठती पीर।
गलती ऐसी क्या हुई,बेढब हुआ शरीरll 
 
निज मन की करती रही,खाये छककर खाज।
मुझे भुगतना पड़ रहा,हाल हुआ जो आजll 
 
हथिनी जैसी बन गई,चलना हुआ मुहाल।
दुश्कर जीवन पथ लगे,बहुत बुरा है हालll
 
देख दशा इस नार की,खाते हैं सब खार।
अपमानित होना पड़े,`सचिन` इसे हर बारll
 
सोच-समझ भोजन करो,तन का रखो ध्यान।
तन सुंदर जो पा गए,मान का हो न हानll 
परिचय-संजीव शुक्ल लेखन में उपनाम `सचिन` का उपयोग करते हैंl ७ जनवरी १९७६ को लौरिया(पश्चिमी चम्पारण), बिहार में जन्मे श्री शुक्ल का निवास वर्तमान में दक्षिणी दिल्ली में है,जबकि स्थाई पता जिला पश्चिमी चम्पारण हैlआपकी शैक्षणिक योग्यता-स्नातकोत्तर(संस्कृत) हैlइनका कार्यक्षेत्र-निजी क्षेत्र में नौकरी (दिल्ली)हैlसामाजिक गतिविधि के अंतर्गत किसी भी प्रकार की सामाजिक कुप्रथा(दहेज,भ्रूण हत्या आदि)का कट्टर विरोध करते हुए समाजसेवा को जीवन का प्रथम एवं एकमेव लक्ष्य बनाकर सक्रिय हैंlइनकी लेखन विधा-काव्य होकर सीखने का क्रम जारी है।प्रकाशन के तहत कुसुमलता साहित्य संग्रह में स्थान मिला है तो अन्य अखबारों आदि में रचना प्रकाशन जारी है। श्री शुक्ल को सर्वश्रेष्ठ रचना के परिपेक्ष्य में प्रशस्ति-पत्र का सम्मान मिला है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-मन के भावों को जनमानस तक पहुंचाना और सामाजिक कुरीतियों को इंगित कर रचना के माध्यम से जनमानस तक पहुंचाना है। प्रेरणा पुंज-फेसबुक पर मिले राजेश पाण्डेय हैं। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा का ज्ञान रखने वाले सचिन की रुचि पुराने गाने सुनना,क्रिकेट मैच देखने-सुनने में है।

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