बापूजी

कीर्ति जायसवाल
प्रयागराज(उत्तरप्रदेश)
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सत्य का उसने दीप जलाकर,
असत्यपूर्ण अंधकार मिटाया।
सत्याग्रह की राह पर चलकर
भारत भूमि स्वतंत्र कराया।
लकुटी ही थी एक सहारा,
लकुटी को न कभी उठाया।
एक धोती लपेटे रहते,
सत्य का सिर पर ताज था।
तन था उनका साँवला,
अफ्रीकन का साथ दिया।
बाल्यकाल से दयावान थे,
हिंसक को भी माफ किया।
शत्रु पर न वार करो,
करना ही है प्यार करो।
बापूजी के वचन थे ऐसे,
“दया-प्रेम के भाव धरो।”
क्यों न चारो भेद सहो,
सत्याग्रह पर डटे रहो।
फिर ऐसा भी दिन आएगा,
दिल से वह माफी माँगेगा
तुम न अपना क्रोध धरो,
भ्रम में था वह माफ करो।
प्रकृति का नियम जान लो,
करके क्षमा महान बनो।
पशु ही लेते हैं बदला,
इंसान हो इंसान रहो॥
(इक दृष्टि यहाँ भी:लकुटी-लाठी,वार-हमला,चारों भेद-साम,दाम,दण्ड और भेद)
परिचय-कीर्ति जायसवाल की जन्मतिथि १ नवम्बर १९९५ है। निवास स्थान  का स्थाई पता-गांव रघुवंशपुर उर्फ रेरुआ मन्सूराबाद(पोस्ट),जिला इलाहाबाद( उत्तरप्रदेश)है। आप एम.ए.में अध्ययनरत होकर लेखन विधा में कविता रचती हैं। कीर्ति जायसवाल की प्रकाशित रचना(कविता)-मछली,मेरा गाँव रघुवंशपुर आदि प्रमुख हैं। आपको बाबू बालमुकुंद गुप्त हिन्दी साहित्य सेवा सम्मान-२०१७ सहित काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान-२०१७ से सम्मानित किया गया है।   

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