बाप ने मारी मेंडकी,बेटा तीरंदाज

सुनील जैन `राही`
पालम गांव(नई दिल्ली)

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हमने अपने पिता को कभी गर्व करने का अवसर नहीं दिया,कि वे हम पर नाज करें। अपने हमेशा से उनकी उम्मीदों पर पानी फेरा। उनकी उम्मीद थी,हम चिकित्सक बनें,हम नहीं बने। उन्होंने चाहा हम कम्पाउंडर बनें,हमारी औकात कम्पाउंडर की भी नहीं थी और हम वह भी नहीं बने।
उनकी उम्मीदें काफी थीं,लेकिन कोई ऐसी उम्मीद नहीं थी,जिसे हमने पूरा किया हो। उन्होंने चाहा कि हम नेतागिरी करें और अपनी सात पुश्तों के लिए खाने का इंतजाम करें। हम नेता नहीं बन पाए,क्योंकि हमारे पास उसके लिए न्यूनतम योग्यताएं यानी चमचागिरी,उठाईगिरी,चरित्र‍हीनता, बेइमानी,झूठ जैसी विशेषताएं हमारे स्वभाव में नहीं थी। हश्र वही हुआ `ढाक के तीन पात।` अब तो नेताओं को नेतागिरी करते देख हमारे पिता मन मसोसकर रह जाते हैं,जब भी हम दिखाई दे जाते हैं,या सामना हो जाता है,देखते ही कह देते हैं, -वैसे हमें तो मालूम है,तुम किसी काम के नहीं हो,लेकिन नेता ही बन गए होते तो हम गर्व से कहते-`हमारा बेटा छोड़ भलाई सर्वगुण सम्पन्न है।`
पिता,पिता होता है,वह कभी हारता नहीं है। हमेशा बच्चों से ही उम्मीद करता है। बच्चे उसकी उम्मीद का खजाना होते हैं। हमारे पिता भी यही समझते हैं। आखिरकार उन्होंने हमें सरकारी नौकरी के लिए प्रयास करने के लिए कहा और वह हम आज तक प्रयास करते आ रहे हैं। उनकी उम्मीद पर आशा के अनुरूप घड़ों पानी फिर गया। सरकारी नौकरी में जहां भी जाते,अंग्रेजी की बात आते ही हम दो-तीन अंग्रेजी के शब्द बोलने के बाद शाहरूख खान की तरह क… क…क…क…करते रह जाते हैं।
हमने ऐसा कोई काम नहीं किया,जिससे उन्हें गर्व करने का मौका मिले। हम नहीं चाहते कि,हमारे पिता हमारी किसी बात पर गर्व करें। उनके गर्व करने से हमारा जीना मुहाल हो जाता,यह हमें अच्छी तरह से मालूम था। अगर हमने पिता को गर्व करने का जरा भी मौका दिया होता,तो उनके दोस्तों की कामों की सूची सुबह-सुबह अखबार की तरह आ जाती है,उसमें अखबार की तरह दुष्कर्म की खबरों के अलावा कुछ नहीं होता।
जब हमारे पिता निराश हो गए,तो उन्होंने कहा-`कुछ नहीं करते तो चैन स्नेचिंग करना सीख लो। शादी कर लो, जिससे कुछ और लोग तरह मेरी चैन से न जी सकें।` शादी करने के लिए एक लड़की होना जरूरी था। नौकरी के लिए योग्यता जरूरी है और शादी के लिए नौकरी जरूरी है। दोनों ही हमारे पास नहीं थी। मुहल्ले की कई लड़कियों पर नज़र जमाने की कोशिश की तो उन्होंने `भैया` कहकर टाल दिया। हम ना तो नौकरी कर सके,ना शादी। पिता ने एक दो और प्रयास किए,लेकिन वे हमेशा की तरह असफल और हम सफल साबित हुए। आप बबूल पर आम तो लगा नहीं सकते। पिता तो हमारे थे,उन्हें तो गर्व करना था। वे चाहे बेटे पर गर्व करें या अपने आप पर। वैसे उन्होंने भी ऐसा कोई विशेष काम नहीं किया था,जिससे उनके पिता ने कभी उन पर गर्व किया हो। इसीलिए उनकी उम्मीद हमसे थी। हमने भी उनके पिता की तरह अपने पिता को निराश नहीं किया।
आखिरकार पिता ने निराश होकर घोटाले पर घोटाले करने शुरू कर दिए। उन्हें तो गर्व करना था। उन्होंने सोच लिया,बेटे ने तो कभी गर्व करने का मौका दिया नहीं,स्वयं ही कुछ ऐसा किया जाए जिससे कि वे गर्व कर सकें। बकरे की अम्मा आखिर कब तक खैर मनाएगी और एक दिन जेल जा पहुंचे। उनके समर्थकों ने काफी शोर मचाया,लेकिन घोटाला करने वाले से ज्यादा घोटाला खोजने वाला होशियार निकला। पिता के जेल जाते ही हम शादी के लिए तैयारी कर चुके थे।
पिता को पहली बार गर्व करने का हमने मौका दिया। हमारी शादी में पिता जेल से आएंगे। बारात में कैदियों की भीड़ होगी,बेरोजगारों की भीड़ होगी,कवांरों की भीड़ होगी। चिकित्सक,कम्पाउंडर नहीं,मानसिक रूप से बीमार लोगों की भीड़ होगी। यह पहला मौका होगा जब,बारात जेल से लड़की वालों के यहां जाएगी।

परिचय-आपका जन्म स्थान पाढ़म(जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद)तथा जन्म तारीख २९ सितम्बर है।सुनील जैन का उपनाम `राही` है,और हिन्दी सहित मराठी,गुजराती(कार्यसाधक ज्ञान)भाषा भी जानते हैं।बी.कॉम.की शिक्षा खरगोन(मध्यप्रदेश)से तथा एम.ए.(हिन्दी,मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया है। पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन खाते में-व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी है।आपकी कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में लेखनी का प्रकाशन होने के साथ आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हो चुका है। राही ने बाबा साहेब आम्बेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया है। मराठी के दो धारावाहिकों सहित करीब १२ आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं,रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में ४५ से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वविद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैं। कुछ अखबारों में नियमित व्यंग्य लेखन करते हैं। एक व्यंग्य संग्रह अभी प्रकाशनाधीन हैl नई दिल्ली प्रदेश के निवासी श्री जैन सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रीय है| व्यंग्य प्रमुख है,जबकि बाल कहानियां और कविताएं भी लिखते हैंl आप ब्लॉग पर भी लिखते हैंl आपकी लेखनी का उद्देश्य-पीड़ा देखना,महसूस करना और व्यक्त कर देना है।

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