बाबुल के आंसूओं से ये कैसी खुशी…

सरिता तिवारी
गोंडा ( उत्तर प्रदेश)
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कभी-कभी मन में विचार आता है कि,जो बेटियाँ ससुराल में दहेज के लिए प्रताड़ित की जाती है, उसमें केवल ससुराल पक्ष ही दोषी होता है या मायके पक्ष का भी दोष होता है ?
जब कोई पिता अपनी बेटी के लिए वर खोजता है तो, उसकी आर्थिक स्थिति को ज्यादा महत्व देता है। मानवीय मूल्यों और संस्कारों की उपेक्षा करता है। यहीं अवसर मिलता है वर पक्ष को वधू पक्ष से मनमाना दहेज मांगने का। जहाँ मानवीय मूल्य नहीं होगे,वहाँ व्यक्ति का आचरण कैसा होगा,आप समझ सकते हैं ? उनके लिए धन से सर्वोपरि कुछ हो ही नहीं सकता। उनकी दृष्टि में पारिवारिक रिश्तों का कोई महत्व नहीं होता है।
एक सत्य व्यथा
हमेशा झूठी शान-शौकत का दिखावा करते रहते हैं। यदि आप अपनी बेटी का रिश्ता ऐसे परिवार में करते हैं, जहाँ दहेज के लोभी रहते हैं,तो ऐसे परिवार में क्या आपकी बेटी खुश रहेगी ? नहीं,कभी नहीं।
आप अपने जीवन की जमा पूँजी विवाह में खर्च कर देंगे ,फिर भी इन लोभियों की इच्छाएं कभी तृप्त नहीं होगी और दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाएगी। आए दिन वो आपकी बेटी को प्रताड़ित करेंगे। शायद! वो आपको बता भी न पाए कि,कितनी विषम परिस्थितियों से गुजर रही है।
विवाह के लिए परिवार और संस्कार को महत्व देना चाहिए,आर्थिक स्थिति को नहीं। जिस बेटी को आपने नाजों से पाला है,जिसके सारे ख्वाब सजाए हैं,उसके लिए योग्य और ऎसे गुणवान जीवनसाथी का चुनाव कीजिए, जो कठिन परिस्थितियों में भी उसके साथ खड़ा हो,कदम से कदम मिलाकर चल सके,उसका सम्मान करे,उसकी ताकत बने कमजोरी नहीं।
यदि हम झूठे दिखावे के वशीभूत होकर अपनी बेटी के लिए खुशियाँ खरीदते हैं तो शायद ! उसकी कष्टदायक स्थिति के लिए हम ही जिम्मेदार होते हैं परन्तु जब तक यह बात हम समझते हैं, तब तक बहुत देर हो जाती है-
खुशियाँ खरीदी थी हमने,
या खरीदा था कफ़न।
ये बात समझ में तब आई,
जब बिटिया का जला है तन॥
परिचय-सरिता तिवारी का निवास और स्थाई पता आजाद नगर(चिरेबसना)पोस्ट-डिडसिया कला बेलसर गोंडा (उत्तरप्रदेश) हैl आपकी जन्म तिथि १ जनवरी १९८० तथा जन्म स्थान-अतरौलिया जरवल रोड(गोंडा)हैl सामाजिक गतिविधि के तहत आप शैक्षिक एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों में प्रतिभागी होकर सबको जागरूक करती हैंl आपकी लेखन विधा-कविता,कहानी है,जबकि प्रेरणा पुंज-सामाजिक समस्याएँ हैंl इनकी रचनाओं का प्रकाशन-प्रसारण समाचार पोर्टल तथा चैनल पर भी हुआ हैl आप पेशे से जिला अस्पताल(गोंडा) में परामर्शदात्री के रूप में कार्यरत हैंl सरिता तिवारी ने समाजशास्त्र विषय में फैजाबाद से स्नातकोत्तर किया हैl आपकी अभिरुचि-गीत,कविता की रचना,लेखन तथा संगीत में हैl सम्मान के रूप में आपको `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान में योगदान के लिए एवं शैक्षिक विकास के लिए भी सम्मानित किया गया हैl सरिता जी की लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना हैl

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