बाबूजी और माँ…

डॉ.दिलीप गुप्ता
घरघोड़ा(छत्तीसगढ़)
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मेरी आमद ये तन-मन जान मेरे बाबूजी और माँ।
मेरी इज्जत मेरा सम्मान मेरे बाबूजी और माँ।

मेरे भोजन-वसन-सामान मेरे बाबूजी और माँ।
जीवन-खेल के मैदान मेरे बाबूजी और माँ।

ठोकर जब लगी तो वो दवा भी और दुआ भी थे,
धड़कन-साँसों पर अहसान मेरे बाबूजी और माँ।

निडर-दुस्साहसी,पल में मिला जो चाहिए होता,
मेरी ताकत मेरी पहचान,मेरे बाबूजी और माँ।

मूंछें ऐंठकर हर मुश्किलों को यूँ मिटा देते,
ममता बांटते मुस्कान..मेरे बाबूजी और माँ।

घर की नींव में छत में मिले मेहनत के किस्से हैं,
घर की जान-घर की शान मेरे बाबूजी और माँ।

जिया-खेला-बढ़ा-लिखा-पढ़ा-ओढ़ा-बिछाया भी,
धरा-क्षितिज भी औ आसमान मेरे बाबूजी और माँ।

मेरे मन्दिर-मेरे मस्जिद-मेरे गुरुद्वारा-चर्च भी,
खुदा-रब और गुरु भगवान मेरे बाबूजी और माँ।

छूकर पैर जिनके दुनिया की हर रण विजय होता,
हिम्मत-जीत के वरदान मेरे बाबूजी और माँ।

धन-वैभव और सुख सम्पत्ति है बेकार उनके बिन,
वही शोहरत औ दौलत-मान मेरे बाबूजी और माँ।

किन्हीं सद्कर्मों के फल थे जो उनकी गोद मे आया,
मेरे अभिमान-जीवनदान मेरे बाबूजी और माँ॥

परिचयडॉ.दिलीप गुप्ता का साहित्यिक उपनाम `दिल` है। १७ अप्रैल १९६६ को आपका जन्म-घरघोड़ा,जिला रायगढ़ (छग) में हुआ हैl वर्तमान निवास घरघोड़ा स्थित हनुमान चौक में ही हैl छत्तीसगढ़ राज्य के डॉ.गुप्ता ने एम.डी.(मेडीसिन)और डीएसी की शिक्षा हासिल की हैl कार्यक्षेत्र में आप निजी चिकित्सा कार्य करते हैंl सामाजिक गतिविधि में अग्रणी होकर असहायों,गरीबों,बीमारों की हरसम्भव सहायता के साथ ही साहित्यिक सेवाएं-जन जागरण में भी तत्पर रहते हैं। आपकी लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल तथा कविताएं हैंl प्रकाशन में खुद की `हे पिता`(ओ बाबूजी)पुस्तक व करीब 20 संकलनों में रचनाएं प्रकाशित हुई है। आपको प्राप्त सम्मान में-कला श्री २०१६,डॉ.अब्दुल कलाम सम्मान सहित साहित्य अलंकरण २०१६ और दिल्ली से `काब्य अमृत` सम्मान आदि ख़ास हैंl २०१६ में कवि सम्मेलन में `राष्ट्रीय सेवा सम्मान` ४ बार प्राप्त किया है। डॉ.दिलीप की लेखनी का उद्देश्य समाज और संसार से बुराइयों को समाप्त कर अच्छाइयों से जन-जन को वाकिफ कराना है।

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