बारिश

बोधन राम निषाद ‘राज’ 
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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देखो सावन झूम के,आई है इस बार।
रिमझिम बरसे बारिशें,सुन्दर पड़े फुहार॥

 

हरियाली भरपूर है,देखो चारों ओर।
सुन्दर रूत सुहावनी,नाच रहा है मोर॥

 

तुम जो हो तो गम नहीं,दिल भी तेरे पास।
चलो बनाएं आज हम,बारिश को इस खास॥

 

मोती जैसी बूँद हैं,बरसे चारों ओर।
बारिश का लेलो मजा,सावन भाव विभोर॥

 

आओ प्रियतम बाग में,बारिश का मधु मास।
मन में छाई उमंग है,मिलने की है आस॥

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