बिदा होने का गम

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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उमर के ६० बसंत क्या पार हुए,नौकरी ने बाय-बाय,टाटा कह दिया। कुछ लोग
सेवानिवृत्ति को उत्सव का दर्जा दे रहे थे तो कुछ यकीनन गमजदा थे कि आज
‘माड़ साब’ हमारे परिवार से बिदा हो रहे हैं। अब उनके ज्ञान-अनुभव के लाभ
से वंचित हो जाएंगे। विभाग ने छोटा-मोटा समारोह ने रखा। शॉल-श्रीफल से ईमानदारी का अभिवादन किया। खटटे-मीठे प्रसंगों और अनुभवों का बखूबी बखान किया गया। हर एक आदमी ने अनुभव से सींचे जीवन के चरण स्पर्श करके सम्मान दिया। सवा पांच बज रहे थे,बिदाई की बेला सचमुच ढलती जा रही थी। ‘माड़ साब’ गेंदे की माला पहने मिश्रित भाव लिए आधी बत्तीसी का इस्तेमाल कर रहे थे। कार्यक्रम के अंत में स्वल्पाहार की व्यवस्था ने सभी को कस कर बांधे रखा था। चार-पांच बार जम्हाई ले चुके गड़बड़ीलाल जी आनन्द का अनुभव कर रहे थे। पदोन्नति की राह में
रोड़ा बने ‘माड़ साब’ के हिलने से उनके सपने साकार होंगे। बिदाई में परिवार का एक भी बच्चा आज उन्हें लेने नहीं आया, यह गम अन्दर ही अन्दर साल रहा था। बड़ा बेटा जिसे ऋण लेकर अभियांत्रिकी कराई थी,वह पढ़ाई के लिए बाहर चला गया,उसने आज तक सुध नहीं ली। मंझला बेटा, ‘माड़ साब’ से ज्यादा पढ़ गया,इसलिए उसे कार्यक्रम में आने में शर्म आती है और सबसे छोटा बेटा निजी नौकरी में है,इसलिए वह शाम सात के आसपास ही लौटेगा। मन ही मन अपने-आपको समझाते हुए ‘माड़ साब’ ने बिदाई को संबोधित किया और परिवार से जुदा होने का गम साझा किया। जैसे-तैसे उतावली मैडम ने अपना मेक-अप सुधारते हुए तीन बुराई के बीच एक अच्छाई वाली बात कह ही डाली। इन सबके बीच नाश्ते की तश्तरियां वायुमंडल में लहराती हुई श्रोताओं की हथेली की शोभा बढ़ाने लगी। एक-एक करके सभी ने कचोरी,आलू की चिप्स, एक मिठाई और बड़ी चुटकी मीठे मिक्चर का लुत्फ उठाया। फिर ‘माड़ साब’ को रवाना किया गया।

परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

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