बूंदों से मनुहार

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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खोल दो,
जुल्फ मेघ की,
बरसने दो,
बूंदों को
भीनी-भीनी बारिश में,
आज भीगने दो,
बूंदों को।
रूठ गई थी,
बूंदें तुम्हारी तरह
आज फिर,
जी भरकर
मचलने दो,
बूंदों को।
घुंघरू छनकाती
प्रेमगीत गाती,
मदमस्त बयार में
झूमने दो,
बूंदों को।
तुम्हें पाकर
खिल उठी,प्रकृति
तीज-त्यौहार और
मन सारे
आज शीतल पवन में,
बहने दो,
बूंदों को।
तुम्हीं से है, जीवन
प्राण तुम्हीं से,
आज फिर वसुधा से
मिलने दो,
बूंदों को॥
परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

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