बेदखल

प्रशान्त करण
रांची(झारखण्ड)
**************************************************************
     मुझे कुछ पता नहीं चल पाया। रातों- रात मैं बेदखल हो गया। बेदखल भी ऐसा कि मेरा घर जहां था,अब भी वहीं है। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया कि घरवाली मुझे घर से निकाल दे। घरवाली ने भी मुझे घर से नहीं निकाला है। मेरे जैसे कुविचारी को वह अब भी बर्दाश्त करती है। सेवानिवृत्ति के बाद जब घर में पैसे की बहुत कमी हो गई,उसे भी वह सह रही है। कभी कोई मांग नहीं। मेरे चाल-चलन भी कोशिशों के बाबजूद संस्कारों की बुरी ताकतों से अब तक खराब नहीं हो पाए।इसलिए पड़ोसियों ने भी बेदखल  नहीं किया है। मैं फिर भी बेदखल हूँ,मैं ही नहीं मेरी धर्मपत्नी और पुत्र जो आजकल अवकाश में चंद दिनों के लिए घर आए हैं,सबके-सब बेदखल हो गए हैं। किसी बाहुबली से मेरी ऐसी दुश्मनी नहीं है कि वे जबरन मुझे बेदखल करें। उन लोगों ने भी बेदखल नहीं किया। कोई फर्जी कागजात बनाकर मेरे घर पर दावा करने नहीं आया। हालांकि,यह हमारे यहाँ की प्रचलित व्यवस्था है। मैं इससे भी अछूता हूँ। कोई आयकर का छापा नहीं पड़ा है, ‘ ‘ईडी’ वालों का भी छापा नहीं पड़ा, पुलिस के थानेदार द्वारा मेरे मकान को सील नहीं किया गया। नगर निगम वालों की धमकियाँ अखबार में कुछ महीने पढ़ी जरूर थी कि अगर होल्डिंग कर नहीं जमा किया तो घर सील हो जाएगा। आम आदमी की तरह डरपोक और कानून मानने वाला हूँ। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही पूरे साल का होल्डिंग कर कतार में खड़े होकर जमा कर आता हूँ। कभी बकाया नहीं रखा। हम लोगों ने बैंक से कोई कर्ज भी नहीं लिया है। मेहुल चौकसी और नीरव मोदी जैसे मामा-भगिने,परम् आदरणीय महान पथप्रदर्शक श्रीमान विजय माल्या जी जैसे दिगपुरुषों  की जीवनी से  बुरी तरह प्रभावित होकर पासपोर्ट बनवाकर बैंकों से ऋण लेने का प्रयास भी किया था,पर जैसे ही उन्हें मालूम हुआ कि सेवानिवृति को प्राप्त हो चुका हूँ,उन लोगों ने मेरे उधार का आवेदन ही फौरन निरस्त कर दिया। लिहाजा किसी बैंक या वित्तीय संस्थान वालों ने भी बेदखल नहीं किया।वैसे मुझे समाचार पत्रों से इस आशय की जानकारी भी मिली है कि कई ने उधार नहीं भी लिया तो भी बैंक वाले वसूली की कारवाई कर डालते हैं,पर मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ। हम सब पूरे परिवार सहित बेदखल हो चुके हैं। यह सब ईश्वर की लीला है। हम लोग आम आदमी की ही तरह सरकार को ईश्वर से कम थोड़े ही मानते हैं। उनकी कृपा से अपना जीवन बिताते हैं। ईश्वर कहता है कि तुम्हारे मकान का कर तीन गुणा कर दिया है, बिजली का बिल तीन गुणा बढ़ा दिया है, क्योंकि सरकार को राजस्व चाहिए।हम लोग आम आदमी की तरह कोई भी प्रतिकार करने के लायक ही नहीं हैं।चुपचाप इसे ईश्वर का आदेश मानकर अपने आंसूओं को पोंछकर जितना कहा जाता है निर्विकार भाव से जमा कर देते हैं। आम आदमी को ईश्वर से बहुत मदद की उम्मीद नहीं होती। हमें भी नहीं है।लाइन बहुत देर तक कटी रहे,पानी की आपूर्ति बंद हो जाए,सड़क गड्ढों को जोड़कर किसी तरह बना दी जाए,सीवरेज सिस्टम के लिए आधी सड़क महीनों से खोदकर रख दी जाए,मुहल्लों में गन्दा पानी भरा रहे,मच्छरों को मारने के लिए कभी- कभार फोगिंग मशीन के दर्शन मात्र हों,जबरन पार्किंग के लिए पैसे लिए जाएं हमने भी कभी प्रतिकार नहीं किया। हर नियम कानून को ईश्वर का आदेश मानकर भक्ति-भाव से सेवा करते रहे हैं।कभी किसी सरकारी काम में उसे होने के लिए पैसे मांगने पर न नहीं किया। कभी-कभी बाबू के तबादले के बाद भी दुबारा दिया। काम नहीं होने पर कहीं शिकायत तक नहीं की। किसी प्रकरण-मुकदमे में नहीं पड़ा। झूठे प्रकरण के लिए श्रद्धा से दक्षिणा चढ़ाई। अदालत से मेरे खिलाफ कोई आदेश नहीं निकला,फिर भी बेदखल हो गए। गज़ब तब हुआ कि हमें बेदखल होने की जानकारी भी एकाएक मिली।
       हम वार्ड क्र.१९ में रहते हैं। सरकार के हुक्म के तामिली में हम लोगों ने मतदाता पहचान-पत्र भी बनाए। उस पर मेरी तस्वीर है,बूथ क्र.,मतदान केंद्र तक का नाम लिखा है,पूरा पता लिखा है। नया पत्र है। कल हमारे यहाँ नगर निकाय का चुनाव था। हमारी इमारत के सभी लोग उस बूथ पर पँहुचे। हम भी कतार में लगे। बहुत देर बाद जब मेरा क्रम आया तो मुझे बताया गया कि आपका नाम ही नहीं है।अगल-बगल की बूथों में देख लें।संविधान में दिए गए अधिकार के प्रयोग के लिए ईश्वर ने अपील भी की। मेरी कर्तव्यपरायणता जोर मारने लगी।लिहाजा हम सपरिवार कड़ी धूप में ३ किलामीटर की दूरी में अवस्थित सभी बूथों पर गए। ईश्वर की महिमा,मत देने का अवसर ही नहीं मिला। कहीं नाम का नामोनिशान तक नहीं मिला। सुबह से दोपहर के डेढ़ बजने वाले थे। भूख-प्यास से आकुल-व्याकुल थे। गलती से वार्ड नम्बर क्र.१९ के घोषित नियंत्रण कक्ष में फोन किया। बड़ी मिन्नतों के बाद उस सज्जन ने मेरी व्यथा सुनी। मुझे हुक्म हुआ कि इस तरह की शिकायत पर्यवेक्षक से करें। उनका नम्बर भी दिया गया,पर पर्यवेक्षक नामक ईश्वरीय दूत ने मुझे इस लायक ही नहीं समझा कि मेरा फोन भी उठाया जाए।
मध्यमवर्गीय भीरू होता है। उसे धर्म और ईश्वर का बड़ा डर रहता है। अन्त में ईश्वर को पाती भेजी। चुनाव आयोग को मेल भेजा। दो घण्टे के बाद आयोग द्वारा बताया गया कि मेरा नाम ईश्वर के दूतों ने वार्ड क्र.१० में भेज दिया है। मैं १९ में रहता हूँ,परिसीमन लागू होने के बाद। सब-कुछ होने के बाद पता नहीं किस भूल की सजा ईश्वर ने दी,मुझे समझ नहीं आया,लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग की ततपरता को मैंने प्रणाम किया। ऐसे अभूतपूर्व अनुभव कम होते हैं जब ईश्वर कालावधि में आपकी सुन ले,लेकिन मुझे विस्थापित होने का दुख बड़ा लग रहा था। मैं इस बड़े दुख के बोझ से दबता चला गया,लेकिन सुबह होते ही मेरा दर्द थोड़ा कम हुआ। मेरे जैसे ईश्वर के भक्त भारी संख्या में थे। हम दूसरों के दुख से सूखी होते हैं। अब बेदखल होने का मेरा दुःख मुझे बड़ा नहीं लग रहा था। शायद ईश्वर की यही मर्जी थी,मानकर सब फिर से ईश्वर की भक्ति में लगे हैं। ईश्वर सर्व शक्तिमान है। ईश्वर से कभी कोई गलती नहीं होती। मनीषियों का कथन है कि ईश्वर को यह अधिकार है कि वह हमें दंडित करता रहे ताकि उसके होने का एहसान बना रहे।ईश्वर समर्थ है।तुलसी दास ने लिखा है-
‘समरथ को नहीं दोष गोसाईं,’
इसलिए हम सभी विस्थापित अपनी दुर्दशा के लिए दोषी हैं। ईश्वर दयावान होता है। वह इस पुनीत कार्य मे जुड़े सभी हाकिम-हुक्मरानों पर कुछ नहीं करेगा,मुझे पक्का विश्वास है। मैं ईश्वर पर भरोसा रखता हूँ। आगे भी ईश्वर के आगे नतमस्तक रहूँगा। यह चुनाव मुझको आध्यात्मवाद सिखा गया है।
परिचय : प्रशान्त करण की जन्मतिथि-छः जून उन्नीस सौ छप्पन तथा जन्म स्थान- मुज़फ़्फ़रपुर(बिहार)है। आप वर्तमान  में रांची स्थित रामेश्वरम कॉलोनी में भापुसे (अ.प्रा.)श्री राधेकृष्ण गार्डन के समीप निवासरत हैं। झारखण्ड राज्य के श्री करण ने स्नातक(प्रतिष्ठा),स्नातकोत्तर( वनस्पति शास्त्र)आरआई की भी शिक्षा (जमशेदपुर) प्राप्त की है। आपका कार्यक्षेत्र-पुलिस विभाग में सेवा और मौलिक हिंदी साहित्य लेखन है। सामाजिक क्षेत्र में आप बच्चों के लिए समर्पित भाव से कार्य करते हुए झारखण्ड इकाई के अध्यक्ष हैं। आपकी लेखन विधा-हिंदी काव्य और व्यंग्य लेख है। पुस्तक प्रकाशन में काव्य संग्रह-मत बाँध यहाँ अब तू मुझको(नई दिल्ली) आपके नाम है। बतौर सम्मान सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक एवं विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक के साथ ही सराहनीय सेवा के लिए झारखण्ड पुलिस पदक-दो बार हासिल हो चुका है तो,विविध साहित्यिक मंचों से रचना प्रतिभा सम्मान,रजत रचना प्रतिभा सम्मान,शतकवीर सम्मान आदि भी प्राप्त हो चुके हैं।आपकी उपलब्धियाँ-स्नातक(प्रतिष्ठा)में स्वर्ण पदक और स्नातकोत्तर में विश्वविद्यालय के नए कीर्तिमान स्थापित करना है। प्रशांत करण के लेखन का उद्देश्य-समाज की समस्याओं-कुरीतियों को लेखन के माध्यम से समाज के सामने लाना और मिटाना है। 

Hits: 31

Leave a Response