बे-इन्तहां मैं प्यार दूं

चतुरसिंह सी.एस .’कृष्णा’
भरतपुर (राजस्थान)

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आजा मेरी बांहों में
तुझे बे-इन्तहां मैं प्यार दूं,
तेरी उलझी हुई जुल्फों को
हाथों से सवांर दूं,
तुमने प्रिय समझा नकारा
कोई बात नहीं…
फिर भी संग जीने का
तुझको मैं अधिकार दूं।
आजा मेरी बांहों में,
तुझे बे-इन्तहां मैं प्यार दूं॥

ढलता सूरज भी अब तो
अठखेली कर जाता है,
मन में प्रीत की उमंग
भर जाता है,
हम दूर नहीं हैं प्रिय तुमसे…
बस बक्त सारी बातें
अचानक कर जाता है।
तेरी खुशियों की खातिर
ये जीवन भी वार दूं।
आजा मेरी बांहों में,
तुझे बे-इन्तहां मैं प्यार दूं॥

सारी बातें बस
नजरों से हो जाती हैं,
मिलते ही कलियां
मधुवन में खिल जाती हैं,
यादों का सिलसिला कुछ,
इस तरह जारी रहता है….
न जाने क्यों बस
यादें ही रह जाती हैं।
तेरी मीठी बातों पर,
ये कायनात भी उवार दूं।
आजा मेरी बांहों में
तुझे बे-इन्तहां में प्यार दूं॥

परिचय-चतुरसिंह का साहित्यिक उपनाम-सी.एस.’कृष्णा’ है। इनकी जन्मतिथि २२ अगस्त १९९७ तथा जन्म स्थान-गगवाना है। वर्तमान और स्थाई पता ग्राम गगवाना जिला-भरतपुर (राजस्थान)है। इन्होंने गणित में स्नातक सहित बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। कृष्णा का कार्यक्षेत्र- लेखन कार्य और शिक्षा है। सामाजिक गतिविधि में समाज सुधारक की भूमिका निभाते हैं। लेखन विधा-गीत,कविता,ग़ज़ल और शायरी है। प्रकाशन में आपके नाम २ साझा काव्य संग्रह-काव्य संगम और प्रकाश अविरल धारा सहित साझा लघुकथा संग्रह-दीप देहरी पर है। इसके अलावा प्रधान सम्पादक-एहसास प्यार का(साझा काव्य संग्रह)की जिम्मेदारी निभाई है। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में सी.एस. की रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। प्राप्त सम्मान में-साहित्य गौरव,ऐरावत अलंकरण, विश्वगुरू भारत परिषद सम्मान के साथ ही श्रेष्ठ रचनाकार आदि प्रमुख हैं।

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