बैरागी जी की आत्मा को सदगति प्राप्त हो

निर्मलकुमार पाटोदी
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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आप मध्यप्रदेश में विधायक और मंत्री रहे तथा फिर लोकसभा के सदस्य रहे। जिसने बालकवि नाम को अपना लिया था,जबकि बचपन का नाम नन्दरामदास बैरागी था। संसदीय राजभाषा समिति के सदस्य भी रहे। पहले मध्यप्रदेश के मनासा और बाद में नीमच में निवास रहा। मेरे पास उनके हाथ का लिखा पहला अंतरदेशीय पत्र सन् १९८४ में आया था। सन् १९८८ तक मेरे पास उनके १९ पत्र आए। पत्र व्यवहार का कारण यह रहा कि मैं जनभाषा परिषद् नाम की संस्था का अध्यक्ष था और बैरागी जी को हिन्दी के समाचार पत्रों में अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के विज्ञापनों की कतरनें एकत्रित करके नियमित भेज देता था। वे इन कतरनों को संबंधित विभागों और संसदीय राजभाषा समिति को प्रेषित कर देते थे। सभी पत्रों पर जो कार्यवाही होती थी उसके लिए की गई कार्यवाही के प्रेषित पत्र की प्रति उनको प्राप्त होती थी जिसे वे अपने हाथ से जानकारी का पत्र लिखकर, मूल पत्र मुझे बिना विलंब प्रेषित कर देते थे। इनमें से एक पत्र देश के वित्तमंत्री का भी आया था। एक वर्ष में एेसे लगभग बीस विभागीय पत्र मेरे पास सुरक्षित हैं।


बैरागी जी की सरकार को पत्र भेजने और की गई कार्यवाही के प्राप्त पत्र को अपने हाथ से लिखे पत्र के साथ लगाकर प्रेषक को प्रेषित करने की कार्य-प्रणाली वास्तव में अद्वितीय है। वे राजभाषा हिन्दी के नियमों का पालन सख्ती से चाहते थे। ईश्वर से प्रार्थना कि इनकी आत्मा को सदगति मिले।
             (सौजन्य-वैश्विक हिन्दी सम्मेलन,मुम्बई)

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