ब्रजपति 

डॉ.रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’
फ़िरोज़ाबाद (उत्तरप्रदेश)
*****************************************************************
मोहमुक्त हो मूढ़ मन,सब छोड़ेंगे साथ।
साथ रहेंगे अन्त तक,करुणामय ब्रजनाथ॥
जाल काट संसार का,कर ब्रजपति का ध्यान।
बांध रहा है मन! तुझे,मोहजनित अज्ञान॥
परिचय : हिन्दी भाषा प्रेमी डॉ.रामसनेही लाल शर्मा का साहित्यिक नाम-यायावर है। आपकी जन्मतिथि ५ जुलाई १९४९ तथा जन्मस्थान फ़िरोज़ाबाद (उ.प्र.) जनपद का ग्राम तिलोकपुर है। एमए, पीएचडी सहित डी.लिट्. की उपाधि प्राप्त होने के साथ ही २७ मौलिक कृतियां आपके नाम हैं तो ११० में लेखन की सहभागिता है। सम्पादन में भी १२ में आपका सहभाग है। आपकी रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी के दिल्ली, मथुरा,आगरा व जबलपुर केन्द्रों से हुआ है। राष्ट्रभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए आपने नेपाल,बहरीन, सिंगापुर,दुबई,हांगकांगऔर मकाऊ आदि की विदेश यात्रा की है। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से एमेरिटस फैलो चयनित रहे हैं। आप नवगीत कोष के लिए शोधरत हैं तो अभा गीत व कहानी स्पर्धा में आपकी रचनाएँ प्रथम रही हैं। आपके निर्देशन में ४१ विद्यार्थियों ने शोध उपाधि पाई है। इतना ही नहीं,डॉ. यायावर के साहित्य पर ३ पीएचडी और ५ लघु शोध हो चुके हैं। आपका निवास फ़िरोज़ाबाद में तिलक नगर में है।कार्य क्षेत्र से सेवामुक्त डॉ.शर्मा केन्द्रीय हिंदी निर्देशालय की प्राध्यापक व्याख्यान यात्रा में भी चयनित रहे हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य हिन्दी की प्रतिष्ठा को और बढ़ाना है।

Hits: 17

आपकी प्रतिक्रिया दें.