भगतसिंह 

 गंगाप्रसाद पांडे ‘भावुक’

भंगवा(उत्तरप्रदेश)
****************************************************************
सिर्फ बारह की वय
अप्रतिम क्रांति ऊर्जा का समन्वय,
भरा था जोश संग होश
सामाजिक उत्पीड़न से उपजा
आक्रोश।
हुआ घृणित जलियांवाला कांड
उद्वेलित हो उठे प्राण,
आया काकोरी का फैसला
चार क्रांति वीरों को फांसी,
सोलह को उम्र कैद
फिर चला
साइमन कमीशन का
बहिष्कार-प्रदर्शन,
भयानक लाठीचार्ज में
लाला लाजपतराय का हुआ
स्वर्ग गमन,
उबला भगतसिंह का रक्त,
बेमौत घेरकर मारा गया
सांडर्स।
देख देश की पीड़ा,
बांधा भगतसिंह ने अपने सर
क्रांति का जूड़ा,
बड़ी विपरीत थी
परिस्थितियां,
उत्कर्ष पे थीं दमन नीतियां
हिलाना था आंग्ल साम्राज्य।
जहां अस्त नहीं होता था सूर्य
उसके खिलाफ बज उठा खुला
क्रांति का बिगुल,
उद्देश्य था अपनों को
जगाना,
भारत माँ की लाज बचाना,
करना था साम्राज्य खंडन
आंग्ल शासन का मानमर्दन।
बनी असेंबली कांड की
योजना
जान हथेली पर ले
किया विस्फोट,
भगत नहीं चाहते थे कि
हो शासकों का आखेट,
सिर्फ विस्फोटक संग फेके
अपने पर्चे,
भर गया धुंआ ही धुंआ।
चाहते तो भाग जाते
क्रांति वीर भगतसिंह,
पर जानते थे कि मैं
मरूँगा तो पैदा होंगे
कई भगतसिंह,
मात्र इक्कीस की
उम्र में किया प्राणों का
उत्सर्ग,
जिससे क्रांति की नींव
हो मजबूत,
देशवासियों में उपजे
गर्व,
हिल गयी अंग्रेजी सरकार,
बह चली क्रांति बयार।
बने प्रेरणा स्रोत
तब जागा सोये देशवासियों
में जोश-खरोश,
धन्य-धन्य वो मात-पिता,
धन्य भगतसिंह शेर
तुम बने क्रांति प्रतीक,
अंग्रेजी शासन हुआ ढेर।
सोचिए एक युवा नवजवान
फांसी पर चढ़ा जिससे बचे
देश की शान,
तत्कालीन दल,
भगतसिंह की फांसी टलवाना तो दूर,
उन्हें शहीदी दर्ज़ा भी न दिलवा
सकी,
अफ़सोस!
शर्मनाक!!
बेहद निराशाजनक…॥
परिचय-गंगाप्रसाद पांडेय का उपनाम-भावुक है। इनकी जन्म तारीख २९ अक्टूबर १९५९ एवं जन्म स्थान- समनाभार(जिला सुल्तानपुर-उ.प्र.)है। वर्तमान और स्थाई पता जिला प्रतापगढ़(उ.प्र.)है। शहर भंगवा(प्रतापगढ़) वासी श्री पांडेय की शिक्षा-बी.एस-सी.,बी.एड.और एम.ए. (इतिहास)है। आपका कार्यक्षेत्र-दवा व्यवसाय है। सामाजिक गतिविधि के निमित्त प्राकृतिक आपदा-विपदा में बढ़-चढ़कर जन सहयोग करते हैं। इनकी लेखन विधा-हाइकु और अतुकांत विधा की कविताएं हैं। प्रकाशन में-‘कस्तूरी की तलाश'(विश्व का प्रथम रेंगा संग्रह) आ चुकी है। अन्य प्रकाशन में ‘हाइकु-मंजूषा’ राष्ट्रीय संकलन में २० हाइकु चयनित एवं प्रकाशित हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक एवं राष्ट्रीय ज्वलंत समस्याओं को उजागर करना एवं उनके निराकरण की तलाश सहित रूढ़ियों का विरोध करना है। 

Hits: 8

आपकी प्रतिक्रिया दें.