भाग्य भी होता है…

विश्वम्भर पाण्डेय  ‘व्यग्र पाण्डे’
गंगापुर सिटी(राजस्थान)
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उम्र सजीव की ही नहीं,
निर्जीव की भी होती है।
ये हम सब जानते हैं,
समय पाकर सजीव-निर्जीव
मृत्यु को प्राप्त होते,
हम सबने देखा है…।
पर ये क्या ?
किसी निर्जीव बुत का,
भाग्य भी होता है
ये जाना,
जब देखा उसे
किसी दुकान के बाहर
सुंदर कपड़े पहने हुए।
और ग़ज़ब तो जब हुआ,
जिसे निहार रहा था
एक निर्वस्त्र भिखारी बालक,
तो समझ आया
कि उम्र ही नहीं,
भाग्य भी होता है
हर किसी का…॥

परिचय:विश्वम्भर पाण्डेय का उपनाम व्यग्र पाण्डे हैl जन्म तारीख-१ जनवरी १९६५ और जन्म स्थान-गंगापुर सिटी हैl स्थाई पता गंगापुर सिटी में हैl राज्य राजस्थान के श्री पांडे का कार्यक्षेत्र-शिक्षा विभाग हैl इनकी लेखन विधा-ग़ज़ल,गीत,कविता,लघुकथा आदि हैl आपको हिंदी का भाषा ज्ञान हैl प्रकाशन में-`कौन कहता है`(काव्य-संग्रह)तथा `पाण्डे जी कहिन`(काव्य-संग्रह) आपके नाम हैl कई सामाजिक व साहित्यिक सम्मान आपको मिल चुके हैं। लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक विसंगतियों पर लिखना हैl प्रेरणा पुंज-पंत व निराला हैl रुचि-साहित्य लेखन हैl

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