भाग्य

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
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भाग्य मुकद्दर से बने,कर्म नसीबी खेल।
माधव भी न करा सके,कौरव पाण्डव मेल॥

भाग्य लिखा वनवास जो,कौशल सीता मात।
त्रिलोकी थे राम जी,लगी न कोई बिसात॥

पाँच पति जग जीत थे,पांचाली के भाग।
जीवन भर जलती रही,द्रुपद सुता बिन आग॥

भाग्य बदलता कर्म से,कहता सकल जहान।
मानव अपने कर्म से,जग में बने महान॥

कृषक धरा के भाग्य को,लिखते हल के नोंक।
अपने भाग्य न लिख सके,होयन कभी अशोक॥

सरकारों के भाग्य  का,करे फैसला वोट।
जनगणमन के भाग्य को,जो पहुँचाते चोट॥

खेती करे किसान जो,भाग्य भरोसे होय।
प्रतिदिन घाटा खा रहे,कबहुँ न आपा खोय॥

गाय सभी माता कहे,आदि सनातन बोल।
हुआ भाग्य का खेल ही,आवारा रही डोल॥

भाग्य भरोसे ही रहा,भारत  देश गुलाम।
आजादी तब मिल गई,जागा जब आवाम॥

भाग्य भरोसे ही रहे,जग में लोग गरीब।
किसको मिलते ताज हैं,किसको मिले सलीब॥

भाग्य और संयोग से,हरिश्चन्द्र से रंक।
धर्मराज बैराठ में,बने भाग्य से कंक॥

भाग्य समय का फेर है,होता जो बलवान।
भील लूट ले गोपिका,वही पार्थ के बान॥

भाग्य मुकद्दर कर्म से,बन जाते संजोग।
कोई शोक विशोक में,कोई छप्पन भोग॥

कर्म करो निष्काम तो,बन जाता है भाग्य।
सतत परिश्रम से बने,पुरुषारथ सौभाग्य॥

भाग्य भरोसे मत रहो,करिए सतत सुकर्म।
मिले भाग्य काया मनुज,सभी निभाओ धर्म॥

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा हैl आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) हैl वर्तमान में सिकन्दरा में ही आपका आशियाना हैl राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन(राजकीय सेवा) का हैl सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैंl लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैंl शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः हैl

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