भारत की वास्तविकता

दिप्तेश तिवारी `दिप`
रेवा (मध्यप्रदेश)

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हम चढ़ते सूरज जैसे थे और ढलतों से घबराते थे,
हम शेर शिवा के वंशज बकरी से मिमियाते थे।
अब दुनिया के आकाओं से अक्सर हम टकराते हैं,
बगदादी के दादा को भी हम नानी याद दिलाते हैं॥

सिंहासन में अब गजब का शेरा आया है,
कि अब लाहोर-कराची हमसे थर्राया है।
अच्छे दिन-अच्छे दिन की गुहार लगाए हो,
इससे अच्छा दिन अड़सठ सालों में नहीं आया है॥

कुटिलता का दाग यहाँ हर साधु के भगवा रंगों में है,
कहीं कृपा अटकी है,तो कहीं गोद चढ़े उमाँगों में है।
रावण भी इनको देख शर्मसार होता होगा,
इन बाबाओं का मन तो अपनी ही बेटी अंगों में है॥

पतझर में जब देह तुम्हारा जलती है,
तब खेत का सैनिक हल ठेलता है।
खाना न खाएं खुले आसमान में सोता है,
महलों में सोने वालों तुमको जीवन दान वही देता है॥
(भाव-ओज)

परिचय- दीप्तेश तिवारी का साहित्यिक उपनाम `दीप` हैl आपकी जन्म तिथि १७ जून २००० हैl वर्तमान में आपका निवास जिला रेवा (म.प्र.)स्थित गोलंबर छत्रपति नगर में है। आप अभी अध्ययनरत हैंl लेखन में आपको कविता तथा गीत लिखने का शौक है। ब्लॉग भी लिखने में सक्रिय श्री तिवारी की विशेष उपलब्धि कम समय में ही ऑनलाइन कवि सम्मेलन में सम्मान-पत्र मिलना है।

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