भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल

राजेश पुरोहित
झालावाड़(राजस्थान)
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जन्म दिवस ३१ अक्टूबर विशेष…………
  भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत की आज़ादी के बाद के प्रथम गृह मन्त्री और उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म ३१ अक्टूबर १८७५ को नडियाद (गुजरात) में एक लेवा कृषक परिवार में हुआ था। पिता झवेरभाई व माता लादबा देवी की आप चौथी संतान थे। उनकी शिक्षा स्वाध्याय से हुई और लन्दन से वकालत की। वापस आये और अहमदाबाद में वकालत की। राष्ट्रपिता की प्रेरणा से वे आज़ादी की लड़ाई में भाग लेने लगे। स्वतंत्रता आंदोलन में पटेल का बड़ा योगदान और खेड़ा संघर्ष माना जाता है। गुजरात का यह खेड़ा भूख की चपेट में था। पटेल के प्रयासों से किसानों को करों में राहत दी गई। सरकार को झुकना पड़ा। किसानों के आंदोलन का पटेल ने नेतृत्व किया था। १९२८ में बारडोली के किसानों के साथ रहे।
गृह मन्त्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता देशी रियासतों को भारत में मिलाना था। बिना खून बहाये उन्होंने यह बड़ा काम किया। भारत के एकीकरण में उनके महान योगदान को इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में लिख दिया गया है।
  पटेल के लिखे पत्रों को १९४५ से १९५० की समय अवधि के  के लिए अंगेजी में नव प्रकाशन मन्दिर से प्रकाशित किया गया। दस खण्ड प्रकाशित किये।बाद में इन पत्रों का हिन्दी अनुवाद भी किया। इसमें सरदार पटेल चुना हुआ पत्र व्यवहार,सरदार के विशिष्ट और अनोखे पत्र,भारत विभाजन,आर्थिक और विदेश नीति,मुसलमान ओर शरणार्थी शामिल है।
  महान लेखक पटेल को कई सम्मान मिले। सरदार पटेल राष्ट्रीय स्मारक बनाया गया। अहमदाबाद के हवाई अड्डे का नाम सरदार वल्लभभाई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया।१९९१ में मरणोपरांत उन्हें `भारत रत्न` से सम्मानित किया गया।
  ३१ अक्टूबर २०१३ को पटेल की १३७ वी जयंती पर नए स्मारक का शिलान्यास किया गया। यह विश्व में विशाल प्रतिमा `स्टेचू ऑफ यूनिटी` के नाम से जानी जाएगी। ९३ मीटर से दुगनी ऊंची प्रतिमा बनेगी। पाँच वर्षों में करीब २५०० करोड़ रुपए की लागत से बनाई जाने वाली ये मूर्ति दुनिया की सबसे ऊंची धातु की मूर्ति होगी।
  भारत का एकीकरण करने वाले पटेल ने देश की ५६५ रियासतों को मिलाने का बड़ा काम किया।बारडोली सत्याग्रह की सफलता पर वहाँ की महिलाओं ने उन्हें `सरदार` की उपाधि प्रदान की।
  एक साधारण किसान परिवार का मनुष्य `लौह पुरुष` बन गया। एक शूरवीर के रूप में पटेल ख्याति प्राप्त थे। २०० वर्षों की गुलामी के बाद देशी रियासतों का एकीकरण कर बिखरे भारत को एक किया,जिसके लिए पटेल को किसी सैन्य ताकत की आवश्यकता तक नहीं पड़ी।
  इनकी वाक शक्ति इनकी सबसे बड़ी ताकत बनी,जिसके कारण इन्होंने लोगों को संगठित किया। इनके इस प्रभाव से सारा देश इनके साथ हो गया। १९२२,२४ और २७ में अहमदाबाद के नगर निगम के आप अध्यक्ष रहे। १९२० में गुजरात कांग्रेस से जुड़े थे।१९३२ में गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष बने। गांधी,नेहरू और पटेल  नेशनल कांग्रेस में उस समय मुख्य बिंदु थे। आज़ादी के बाद गृह मंत्री तथा बाद में उप-प्रधानमंत्री बने।
  पटेल की आवाज़ में सिंह-सी दहाड़ थी तो ह्रदय में कोमलता। दीन-दुखियों का सरदार था तो दुश्मनों के लिए लोहे-सा कठोर था। यह एकता की प्रतिमूर्ति थे।
  कर्म से व्यक्ति महान बनता है। पटेल साधारण कृषक से देश के उप-प्रधानमंत्री पद तक पहुँचे।
  सरदार पटेल ने देश का एकीककरण किया। प्रतिवर्ष हम उनके जन्म दिन को `राष्ट्रीय एकता दिवस` के रूप में मनाते हैं।
    पटेल ने कहा था कि डर का सबसे बड़ा कारण विश्वास में कमी है। जिनके पास शस्त्र चलाने का हुनर है,लेकिन फिर भी वे उसे अपनी म्यान में रखते हैंl असल में वे अहिंसा के पुजारी हैं। कायर अगर अहिंसा की बातें करें तो वह व्यर्थ है।
कर्मठ व्यक्ति ही ज्ञानेंद्रियों पर विजय श्री पाता है। क्रोध ही अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की शक्ति प्रदान करता है। महान कार्य करने के लिए शक्ति और विश्वास दोनों जरूरी है।

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