भारत म़ें अनेकता में एकता

आशा जाकड़ ‘ मंजरी’
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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`मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।
हिन्दी हैं हम वतन हैं,हिन्दोस्तां हमाराll` 

हमारा भारत धर्म निरपेक्ष देश है। जहाँ अनेक धर्म हैं,पर सभी धर्म सेवा,परोपकार,नैतिकता,सत्य,प्रेम,पवित्रता और एकता सिखाते हैं। कोई भी धर्म बैर रखना नहीं सिखाता है।
गीता में कहा गया है कि,विभिन्नता में एकता ढूंढना सात्विक ज्ञान है। एकता से ही सारी शक्तियां केन्द्रित होती हैl जहां एकता होती है,वह क्षेत्र तेज गति से उन्नति करता है और अपना लक्ष्य प्राप्त करता है। आप सभी जानते हैं कि, हमारा भारत अनेक धर्म,जातियों और भाषाओं वाला देश है। अतः भारत जैसे विशाल देश में अनेकता का होना स्वाभाविक है। भारत में अनेक विविधताएँ हैं-रंग-रूप की  विविधता,भाषा की विविधता,जाति की विविधता,धर्मों की विविधता,क्षेत्रीय वि्विधता और आस्था की विविधता आदि।इस प्रकार भारत वर्ष विविधताओं का संगम है। यहां इतनी अधिक विविधता है कि,एकता ढूंढने से भी नहीं मिलती है, लेकिन धर्म,जाति एवं भाषाओं की विविधता होते हुए भी भारत में प्राचीन काल से ही एकता विद्यमान रही है। जब कभी किसी ने उस एकता को खंडित करने की कोशिश की है तो भारत का एक-एक नागरिक सजग हो उठता हैl राष्ट्रीयता को जो खंडित करने वाली शक्तियां है,उन शक्तियों का विरोध करने के लिए पूरा देश एकजुट होकर खड़ा हो जाता है। अनेकता में एकता हमारे भारत का गौरव है,भारत की पहचान है और एकता हमारी राष्ट्रीयता का प्रतीक है। एकता का अभिप्राय है संपूर्ण भारत की आर्थिक, सामाजिक,राजनीतिक और वैचारिक एकता। हमारे कर्मकांड,पूजा-पाठ खान-पान, रहन-सहन और वेशभूषा में अंतर हो सकता है,लेकिन हमारे राजनीतिक,साहित्यिक,सामाजिक,वैचारिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण में एकता हैl इस प्रकार अनेकता में एकता ही भारत की प्रमुख विशेषता है।
हमारा भारत देश एक महान देश हैl इसकी संस्कृति एक है। हमारा देश एक ऐसा देश है,जिसमें अनेकता भी है और मूलभूत एकता भी है। हमारे देश में रंग-रूप की विविधता हैl कश्मीरवासी गोरे लाल हैं,तो केरलवासी बिल्कुल काले,उत्तर प्रदेश मध्य भारत के लोग सांवले रंग के होते हैं और हिमाचल प्रदेश के लोग गोरे रंग के होते हैं। भाषा की विविधता भी हमारे देश में बहुत अधिक है,इसलिए हमारा देश बहुभाषी राष्ट्र कहा जाता हैl विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग बोलियां और भाषाएं है,पर सभी एक-दूसरे की भाषाओं का सम्मान भी करते हैं। कभी-कभी भाषा की विविधता ने अनेक विवाद खड़े किए हैं। आज शालाओं में हिंदी-अंग्रेजी के साथ फ्रेन्च,संस्कृत, मराठी आदि भाषाएं पढ़ाई जा रही हैl भारत में जातिवाद सदैव प्रभावी रहा हैl यहां अनेक जाति-जनजाति के लोग रहते हैंl हर जाति अपने को दूसरी से उच्च समझती है। आजादी के बाद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए हर स्तर पर आरक्षण की नीति का विरोध किया गया,जिससे राष्ट्रीयता प्रभावित हुई,लेकिन आज शालाओं में सभी जाति के लोग एकसाथ पढ़ रहे हैं और उच्च पद प्राप्त कर रहे हैं। धर्म के क्षेत्र में देखिए हिंदू मुसलमान,सिख,इसाई,जैन,बौद्ध,पारसी आदि अनेक धर्मों के लोग यहां निवास करते हैंl हिंदू धर्म में भी अनेक विभिन्नताएँ हैंl गुजराती,पंजाबी,मराठी,वैष्णव आदि लोग यहाँ निवास करते हैं।
इसी तरह वेशभूषा और खान-पान,पूजा-पाठ आदि की विविधता है,फिर भी लोग मिल-जुलकर एक-दूसरे के साथ रहते हैं। `कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है` यह आदर्श ही हमारी एकता का आधार है। हम चाहे किसी भी प्रांत में रहें पर पहले हम भारतवासी हैं। उत्तर से दक्षिण पूर्व पश्चिम कहीं भी चले जाएँ,एक ही प्रकार के धार्मिक स्थल,एक ही प्रकार के लोग,एक से विचारों के लोग मिलते हैं। सभी की भारत में आस्था है। विविधता तो यहाँ का श्रंगार है,जैसे किसी बाग में अनेक प्रकार के फूल हैं तो वह बगीचा समृद्ध कहलाता है। उसी तरह हमारा भारत विविधता का धनी देश है,भारत की एकता भी कम प्रकट नहीं है। यहां के निवासी संस्कृति की दृष्टि से एक हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, अटक से कटक पूरा भारत राम ,कृष्ण,रामायण,महाभारत आदि को लेकर एक जैसी आस्था रखता है। पूरे भारत देश के लोग धर्म की दृष्टि से एकता के सूत्र में बंध हुए हैं। विचारों की दृष्टि से भी यहां के लोग उदारवादी और मानवता वादी हैं। खान-पान की विविधता होते हुए भी यहां के लोग शाकाहार को पवित्र मानते हैं। यहां के निवासी परस्पर सहनशीलता और सर्वधर्म समभाव को लेकर जीते हैं।हमें इस भावना को और 
बढ़ाना है। किसी कवि ने कहा है-
`एक राह के मीत हैं हम,मीत एक प्यार के,
एक बाग के फूल हैं हम,फूल एक हार केl `
परिचय-श्रीमती आशा जाकड़ का उपनाम मंजरी है।आपका जन्मस्थल उत्तरप्रदेश का शिकोहाबाद है। कार्यक्षेत्र इन्दौर(म.प्र.)होने से इंदौर में ही निवास है। आपकी शिक्षा एम.ए.(हिंदी,समाज शास्त्र) और बी.एड.है। कार्यक्षेत्र-अध्यापन (३५ वर्ष) है, जिसमें २८ वर्ष तक इन्दौर में ही आपने अध्यापन कराया है। आपको मिले सम्मान में सरल अलंकरण,माहेश्वरी सम्मान,रंजन कलश सहित साहित्यमणि श्री (बालाघाट),कृति कुसुम सम्मान इन्दौर,शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान (उज्जैन), श्री महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान(शिलांग),साहित्य रत्न,राष्ट्रीय गौरव सम्मान (मानद उपाधि) और पूर्णोपमाश्री सम्मान-२०१७ आदि विशेष हैं। सेवानिवृत्ति के बाद आपके काव्य संग्रह-‘राष्ट्र को नमन’, कहानी संग्रह-‘अनुत्तरित प्रश्न’ और ‘नए पंखों की उड़ान’ प्रकाशित हुए हैं। आशा जी बचपन से ही गीत, कविता,नाटक, कहानियां,गजल आदि के लेखन में सक्रिय हैं तो, काव्य गोष्ठियों और आकाशवाणी से भी पाठ करती हैं। सामाजिक गतिविधि में आप अध्यापन नि:शुल्क अध्यापन और महिलाओं के लिए कार्यक्रम करती हैं। आपकी लेखन विधा-गीत, ग़ज़ल,कविता,कहानी तथा आलेख आदि हैं। विशेष उपलब्धि -बेटी बचाओ सम्मान प्राप्त करना तथा एक साहित्यिक संस्था की अध्यक्षा भी रही है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का प्रचार करना है। आपकी रचनाएं विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। आशा जी कई 
प्रमुख संस्थाओं और हित कार्य करने वाली संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं।

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