भारत माँ

गंगाप्रसाद पांडे ‘भावुक’
भंगवा(उत्तरप्रदेश)
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कहीं आगजनी
कहीं मूर्तिखण्डन,
कहीं हत्याएं
कहीं मानमर्दन,
कहीं गोकशी
कहीं झंडा दहन,
कहीं धर्म ग्रन्थों का
अपमान,
कहीं कटु वचन
कहीं आतंकी आग,
कहीं नक्सली
आक्रमण,
कहीं जातिवाद का
विष,
कहीं आत्मघाती
आरक्षण,
आखिर और कितने घात
प्रतिघात सहेगा,
भारत माँ का तन
हम अपने-आपमें
हैं मस्त व मौन,
सोंचिए,अब इन
यक्ष प्रश्नों को
उठाएगा कौन ????
परिचय-गंगाप्रसाद पांडेय का उपनाम-भावुक है। इनकी जन्म तारीख २९ अक्टूबर १९५९ एवं जन्म स्थान- समनाभार(जिला सुल्तानपुर-उ.प्र.)है। वर्तमान और स्थाई पता जिला प्रतापगढ़(उ.प्र.)है। शहर भंगवा(प्रतापगढ़) वासी श्री पांडेय की शिक्षा-बी.एस-सी.,बी.एड.और एम.ए. (इतिहास)है। आपका कार्यक्षेत्र-दवा व्यवसाय है। सामाजिक गतिविधि के निमित्त प्राकृतिक आपदा-विपदा में बढ़-चढ़कर जन सहयोग करते हैं। इनकी लेखन विधा-हाइकु और अतुकांत विधा की कविताएं हैं। प्रकाशन में-‘कस्तूरी की तलाश'(विश्व का प्रथम रेंगा संग्रह) आ चुकी है। अन्य प्रकाशन में ‘हाइकु-मंजूषा’ राष्ट्रीय संकलन में २० हाइकु चयनित एवं प्रकाशित हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक एवं राष्ट्रीय ज्वलंत समस्याओं को उजागर करना एवं उनके निराकरण की तलाश सहित रूढ़ियों का विरोध करना है। 

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