भाषा सीखने के प्रति अंधविश्वास तोड़ने की जरुरत

डॉ.जोगासिंह विर्क
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भारत यह भी जान ले कि अंग्रेजी सीखने का सही तरीका क्या है तो भी कल्याण हो जाएl अंग्रेजी अच्छे से कैसे सीखें:यूनेस्को की पुस्तक(इम्प्रूवमेंट इन द कुआलटी आफ़ मदर टंग-बेस्ड लिटरेसी ऐंड लर्निंग,२००८,पन्ना १२) से निम्न उक्ति इस बारे में दुनिया भर की खोज का सारांश पेश करती है:`हमारे रास्ते में बड़ी रुकावट भाषा एवं शिक्षा के बारे में कुछ अंधविश्वास है और लोगों की आँखें खोलने के लिए इन अंधविश्वासों का भंडा फोड़ना चाहिए। ऐसा ही एक अन्धविश्वास यह है कि विदेशी भाषा सीखने का अच्छा तरीका इसका शिक्षा के माध्यम के रूप में प्रयोग है(दरअसल,अन्य भाषा को एक विषय के रूप में पढ़ना ज्यादा कारगर होता है)। दूसरा अंधविश्वास यह है कि विदेशी भाषा सीखना जितनी जल्दी शुरू किया जाए,उतना बेहतर है(जल्दी शुरू करने से लहजा तो बेहतर हो सकता है,पर लाभ की स्थिति में वह सीखने वाला होता है जो मातृ-भाषा में अच्छी महारत हासिल कर चुका हो)। तीसरा अंधविश्वास यह है कि मातृ-भाषा विदेशी भाषा सीखने के राह में रुकावट है(मातृ-भाषा में मजबूत नींव से विदेशी भाषा बेहतर सीखी जा सकती है)। स्पष्ट है कि ये अंधविश्वास हैं और सत्य नहीं,लेकिन फिर भी यह नीतिकारों की इस प्रश्न पर अगुवाई करते हैं कि प्रभुत्वशाली (हमारे संदर्भ में अंग्रेज़ी–ज.स.) भाषा कैसे सीखी जाए।`
दुनियाभर में अंग्रेजी पढ़ाने वाली इंग्लैंड की सरकारी संस्था ब्रिटिश काऊंसिल की २०१७ में छपी पुस्तक में यह दर्ज है (इंग्लिश लैंगुएज एंड मीडियम आफ़ इंस्ट्रक्शन इन बेसिक एजुकेशन…पन्ना ३):`चारों ओर यह समझ फैली हुई है कि अंग्रेजी भाषा पर महारत के लिए अंग्रेजी एक विषय के रूप में पढने से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ना बेहतर तरीका है,पर इस समझ के लिए कोई प्रमाण हासिल नहीं हैl ब्रिटिश काऊंसिल की इसी पुस्तक में अंग्रेजी माध्यम से नुकसानों के बारे में भी यह दर्ज है (पन्ना ३):`छ: से आठ साल लगते हैं कि कोई बच्चा इतनी-एक अंग्रेजी सीख ले कि उसे पाठ्य-क्रम में शामिल विषय-वस्तु की समझ आ सकेl इतने साल लगाकर भी वह अंग्रेजी इतनी अच्छी तरह नहीं सीख सकता कि वह उच्च श्रेणियों के पाठ्यक्रम को अच्छी तरह समझ सकेl` यदि एक अंग्रेजी माध्यम की शाला में जाने वाले विद्यार्थी का एक साल का खर्च पचास हज़ार रुपए भी मान लें तो आठ साल में यह बिना ब्याज के भी चार लाख बन जाएगाl सो भारत कितना पैसा अंग्रेजी माध्यम शिक्षा के कारण बर्बाद कर रहा है यह सोचने भर से व्यक्ति बेहोशी की अवस्था में जा सकता हैl हिंदी माध्यम शालाओं के बच्चों को अंग्रेजी इसलिए नहीं आ रही क्योंकि वहां तो शिक्षा नाम की कोई चीज़ ही नहीं है और उन बच्चों की सामाजिक पृष्ठभूमि ऐसी है जहां शिक्षा के लिए उत्साह ही नहीं हैl
इसलिए हम भारतीयों को जान लेना चाहिए कि,अंग्रेजी अच्छी तरह सीखने के लिए अंग्रेजी सम्मोहन की बजाए विदेशी भाषा सीखने के बारे में अंग्रेजों की ठीक समझ धारण करने की जरूरत हैl विस्तार के लिए ‘भाषा नीति के बारे में अंतरराष्ट्रीय खोज: मातृ-भाषा खोलती है शिक्षा,ज्ञान और अंग्रेज़ी सीखने के दरवाज़े’ दस्तावेज़ हिंदी,पंजाबी,तामिल,तेलुगू,कन्नड़, डोगरी,मैथिली,ऊर्दू,नेपाली,कोसली,मराठी और अंग्रेजी में पढ़े जा सकते हैंl
(सौजन्य-वैश्विक हिंदी सम्मेलन,मुंबई)

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