भाषा 

वीरेन्द्र कुमार साहू
गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
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भाषा बोली शान अपनी
खुद्दारी का ताज है।
उनको ही मिल सकता कहीं
जिनको इस पर नाज है॥
भाषा से मिलता मान है 
इनसे कदर बनी रहे।
जो सुनेह निज भाषा करे 
प्रतिष्ठा का धनी रहे॥
आप बातें बेहिचक करें 
अपने मन की भाव को।
कैसी भी हो परिस्थितियाँ
मुखरित करे अभाव को॥
आ जाती है जुबानों पे 
अनुभूति दुखद दर्द की।
कह सके हैं बड़े प्रेम से  
अवस्थाएँ सहर्ष की॥
अभिलाषा कर दे जो पूरी 
इन्द्रिय अभिव्यक्ति को।
गौरव और स्वाभिमान की 
बढ़ा सके जो शक्ति को॥
माता की ममता लीजिए 
भाषा की आभास में।
सुख सपूत वाला दीजिए
भाव के एहसास में॥
परिचय-वीरेन्द्र कुमार साहू का जन्म १५ दिसम्बर १९८७ को बोड़राबांधा (राजिम) में हुआ हैl आपका वर्तमान निवास ग्राम-बोड़राबांधा,पोड़(पाण्डुका),जिला-गरियाबंद (छत्तीसगढ़)हैl यही स्थाई निवास भी हैl छत्तीसगढ़ राज्य के श्री साहू ने एम.ए.(हिन्दी) और डी.पी.ई. की शिक्षा प्राप्त की हैl आप कार्यक्षेत्र में शिक्षक हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत स्वयं के समाज में सेवी हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,कविता हैl ब्लॉग पर भी सक्रिय लेखन करते हैंl वीरेंद्र साहू की लेखनी का उद्देश्य-भावों की अभिव्यक्ति से नवजागरण करना हैl 

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