भ्रष्टाचार

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
*************************************************

व्याप रहा संसार में,सब जन भ्रष्टाचार।
ढूँढे से मिलता नहीं,अब जग सदआचार॥

गली हाट बाजार में,दफ्तर अरु चपरास।
भ्रष्ट सभी जन हो रहे,रिश्वत तेरी आस॥

अधिकारी नेता बड़े,डॉक्टर साहूकार।
पटवारी राजस्व तो,हैं सबके सरदार॥

मंत्री अरु सांसद बने,भ्रष्टाचारी जीव।
पद से ये हट जाए तो,हो जाएँ निर्जीव॥

रिश्वत तो सुविधा बनी,कहते यही दलाल।
लुटते दीन गरीब ही,अफसर मालामाल॥

राम भरोसे चल रहा जिनका कारोबार।
वे ही बस धनवान हैं,बाकी हम बेजार॥

ईश दूत वे बन रहे,कथा राम की बाँच।
वे सब साधु धींगरे,नेकु न आवै आँच॥

देव रिझाने को चढ़े,सवामणी परसाद।
जितना ज्यादा जो चढ़े,वो पहले फरियाद॥

रिश्वत से प्रभु नहि बचे,का बचिए इंसान।
जितनी मोटी रकम दे,वे सच्चे ईमान॥

हम तुम कहा बलाय जो,रिश्वत देय न लेय।
इससे जो बचना चहै,गरल उसी का पेय॥

सदाचार सब मानते,अब तो भ्रष्टाचार।
मानो या न मानिए,जीवन का आधार॥

बड़े-बड़े नेता हुए,घोटालों के शोेर।
छोटे कर्मी क्या करें,बेचारे चमचोर॥

रक्षक ही भक्षक बने,भारत में सिरमौर।
वा रे भ्रष्टाचार भइ,तेरा ओर न छोर॥

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा हैl आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) हैl वर्तमान में सिकन्दरा में ही आपका आशियाना हैl राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन(राजकीय सेवा) का हैl सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैंl लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैंl शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः हैl

Hits: 8

आपकी प्रतिक्रिया दें.