मंदिर-मस्जि़द 

स्वीटी गोस्वामी भार्गव
आगरा(उत्तर प्रदेश)

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मन्दिर या मस्जिद,
चल रहा है मुद्दा ज्वलन्त यही आजकल
शहर से लेकर गाँव में,
राजनीति के गन्दे खेल में लग गए
आज धर्म भी दाँव में।
कुछ हिन्दू,कुछ मुस्लिम लड़ रहे हैं बस
इस नाम पर,
नहीं है सुकून आज अपनेपन की छांव में।
सांस लूँ भी तो कैसे
घुल गया है जहर आजकल हद से ज्यादा,
मेरे शहर की हवाओं में।
कैसे भरे जख़्म अब यारों,
खत्म हो रहा है असर अब दवाओं और दुआओं में।
जहां दी जाती थी मिसाल सदभावना और एकता-प्रेम की,
वहीं दिखने लगा है खून अब एक-
दूसरे की निगाहों में।
बोल उठा वो मूरत से बाहर निकलकर,
मेरा भगवान और तेरा खुदा
तुम मुझे कहां ढूंढ रहे हो…
मैं छुपा बैठा हूँ तेरे वजूद के हर
प्यार और गुनाहों में॥
परिचय- स्वीटी गोस्वामी भार्गव का शहर-जिला आगरा(उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान में आप आगरा स्थित काना पटेली में निवासरत हैं। परास्नातक(हिंदी एवं संस्कृत) तक शिक्षित श्रीमती भार्गव हिंदी अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। लिखना आपका शौक है। लेखन विधा-गद्य एवं पद्य है। १६ वर्ष से हिंदी के साथ आप संस्कृत भी पढ़ा रही हैं। माँ सरस्वती की कृपा से आप आकाशवाणी में कविता वाचन कर चुकी हैं। भिन्न-भिन्न समाचार पत्रों में रचना प्रकाशन हो चुका है। आपको एक प्रकाशन से काव्य गौरव और मानवता रत्न सम्मान-पत्र के साथ ही महफ़िल-ए-गजल साहित्य समागम सम्मान-पत्र और शतकवीर सम्मान-पत्र भी प्राप्त हुआ है। श्रीमती भार्गव की लेखनी का उद्देश्य हिंदी को प्रचारित करना और महिला चेतना फैलाना है।

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