मकान

अंकित अशोक कुमायूं ‘अंकित’
इंदौर(मध्यप्रदेश)

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मैं गम भरी रातों में,डूबा हुआ ग़ज़ल लिख रहा था,
बरसात तेज थी,मेरी छत के छज्जे से पानी टपक रहा था।

टपकती बूंदों से,मैं खुद को बचा रहा था,
मगर आँखों से आँसू बहता जा रहा था।

उम्र गुजार दी जिस मकान में,उसे छोड़ने का मन नहीं था,
ता-उम्र जिया हूँ जिस मकान में,वो चद्दर का मकान मेरी बहू को पसंद नहीं था।

बचपना,जवानी,अब बुढ़ापा,सोचा मर जाऊँगा इसी मकान में,
उस परदेस में मेरा क्या काम है।

मेरी जिंदगी ने तोड़ा दम इसी मकान में था,
तुम्हारा बचपन भी इसी मकान में था।

तुम्हें काबिल बनाया मैंने,तुम्हें चलना सिखाया मैंने,इसी मकान में था,
मेरे लिए वो बंगला बेकार,मेरा चद्दर का मकान किसी जन्नत से कम न था॥

परिचय :अंकित अशोक कुमायूं की जन्मतिथि १० अक्टूबर १९८८ और जन्म स्थान इंदौर(मध्यप्रदेश)है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘अंकित’ है। वर्तमान में इंदौर के मुराई मोहल्ला(जूनी इंदौर) में बसे हुए हैं। बारहवीं तक शिक्षित श्री कुमायूं का कार्यक्षेत्र-नौकरी है। लेखन विधा-गीत है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-शब्दों को पहचान दिलाना है। माया नगरी बम्बई में रहकर भी फिल्मों में लेखन कार्य में अनुभव लिया है 

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