मजदूर

डॉ.नीलम कौर
उदयपुर (राजस्थान)
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खुशनसीब या बदनसीब कहो,
कलैंडर की इक तारीख पर तो हक इनका है।
नहीं अहसास वर्तमान को,
पर तवारिख में तो नाम
इनका है।
वर्ष पर्यंत हकीर जिन्हें समझा किए,
शुकर है एक दिन ही सही नाम इनका होता है।
विडंबना बस इतनी है कि,
स्वतंत्रता और गणतंत्र की तरह
कैलैंडर से उतर ऊँचे मंचों पर,
भाषण और कविताओं में
याद उन्हें किया जाता है।
पर पंडाल से बाहर रेहड़ी,
खोमचे,ठेले वालों से
मोल किया जाता है।
आग उगलती छत आसमान की,
तपती धरा पर खड़े मजदूर को
छाँव कहाँ दी जाती है।
भोजन की आधी जूठन छोड़,
मूंछ मरोड़ने वालों से
लतियाते,गाली खाते लोगों का कितनों ने आदर मान किया।
दुख की चादर ओढ़कर,
गम से प्यास बुझाने वालों का दुख
किस सहृदय की आँख से ढुलका है।
एक दिन बस एक दिन,
मजदूर दिवस बस एक दिन
कैसे हम गर्व से कहते
हम मजदूर आज दिवस है,
मजदूरों का दिन॥

परिचय – डॉ.नीलम कौर राजस्थान राज्य के उदयपुर में रहती हैं। ७ दिसम्बर १९५८ आपकी जन्म तारीख तथा जन्म स्थान उदयपुर (राजस्थान)ही है। आपका उपनाम ‘नील’ है। हिन्दी में आपने पी-एच.डी. करके अजमेर शिक्षा विभाग को कार्यक्षेत्र बना रखा है। आपका निवास स्थल अजमेर स्थित जौंस गंज है।  सामाजिक रुप से भा.वि.परिषद में सक्रिय और अध्यक्ष पद का दायित्व भार निभा रही हैं। अन्य सामाजिक संस्थाओं में भी जुड़ाव व सदस्यता है। आपकी विधा-अतुकांत कविता,अकविता,आशुकाव्य और उन्मुक्त आदि है। आपके अनुसार जब मन के भाव अक्षरों के मोती बन जाते हैं,तब शब्द-शब्द बना धड़कनों की डोर में पिरोना और भावनाओं के ज्वार को शब्दों में प्रवाह करना ही लिखने क उद्देश्य है।

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