माँ अंबे नव अवतार

संध्या चतुर्वेदी ‘काव्य संध्या’
अहमदाबाद(गुजरात) 
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जय अंबे,अष्ट भवानी अंबे माँ,
सिंह भवानी जय माँ,जगदंबे अंबे माँ।
जय माँ शैलपुत्री,आ जाओ मेरी माँ,
धन-धान्यप्रदायिनी मेरी माँ।
शेर पर सवारी कर,दुष्टों का संहार करो माँ।

जय माँ ब्रह्मचारिणी,आ जाओ मेरी माँ,
बुद्धि विवेक प्रदान कर,सबका कल्याण करो माँ।
त्याग-संयम-वैराग्य प्रदायिनी मेरी माँll

जय माँ चंद्रघंटा,आ जाओ मेरी माँ,
पापों का विनाश कर वीरता प्रदायिनी मेरी माँ।

जय माँ कुष्मांडा,आ जाओ मेरी माँ,
रोग शोक नाशिनी,यश वृद्धि प्रदायिनी,मेरी माँ।

जय माँ स्कंदमाता आ जाओ मेरी माँ,
मोक्ष-द्वार प्रदायिनी,चिंता दु:ख-हरणी मेरी माँ।

जय माँ कात्यायनी,आ जाओ मेरी माँ,
अद्भुत शक्ति प्रदान कर,दिव्य-स्वरूप दायिनीl
आ जाओ मेरी माँl

जय माँ कालरात्रि,आ जाओ मेरी माँ,
दुश्मन का विनाश करl
दुष्टों का संहार करो मेरी माँll

जय माँ महागौरी,आ जाओ मेरी माँ,
सर्व-सुख प्रदायिनी,सुंदर-वर प्रदान कर मेरी माँ।
जय माँ सिद्धिदात्री,आ जाओ मेरी माँ।
सब दु:ख दूर कर,अमरत्व प्रदान करो मेरी माँll

अष्ट भवानी दुर्गा माँ,सिंह वाहिनी मेरी माँ,
आ जाओ मेरी माँ आ जाओ मेरी माँll

परिचय : संध्या चतुर्वेदी का साहित्यिक नाम काव्य संध्या है। आपने बी.ए. की पढ़ाई की है। कार्यक्षेत्र में व्यवसाय (बीमा सलाहकार)करती हैं। २४ अगस्त १९८० को मथुरा में जन्मीं संध्या चतुर्वेदी का स्थाई निवास मथुरा(उत्तर प्रदेश)में है। फिलहाल अहमदाबादस्थित बोपल (गुजरात)में बसी हुई हैं। कई अखबारों में आपकी रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। लेखन ही आपका शौक है। लेखन विधा-कविता, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहा, धनाक्षरी, कह मुकरिया,तांका,लघु कथा और पसंदीदा विषय पर स्वतंत्र लेखन है। संध्या जी की लेखनी का उद्देश्य समाज के लिए जागरुक भूमिका निभाना है। आपको लेखन के लिए कुछ सम्मान भी मिल चुके हैं|

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