माँ की आखरी याद

सुरेश जजावरा ‘सुरेश सरल’
छिंदवाड़ा(मध्यप्रदेश)
******************************************************

बस धुंधली-धुंधली-सी यादें हैं ,

मैंने अच्छे से माँ को देखा ही नहीं।

सब फक्र से लिपटे हैं माँ के आंचल से ,

मैं किससे लिपटूं,मेरे पास माँ ही नहीं॥

दो-चार तस्वीरें जहन में है,

बहुत ज्यादा तो याद नहीं।

अस्पताल के सफेद चादर और नर्सें,

इतना छोटा था कि मैं रोया भी नहीं॥

ज्यादा शब्द नहीं हैं मेरे पास,

मैं ज्यादा लिख भी नहीं पाया हूँ।

जीवनभर साथ रहकर भी नहीं समझते,

शुक्र है मैं थोड़ा तो माँ पर लिख पाया हूँ॥

Hits: 17

आपकी प्रतिक्रिया दें.