माँ की कड़ी

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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५ लड़कों और १ लड़की की लाड़ली `जी`(माँ) चल बसी। अंतिम यात्रा में सभी लड़के इतना विलाप कर रहे कि मानो,सर्वस्व लुट गया हो। सभी लड़के उच्च पदों पर आसीन हैं,इसलिए अंतिम यात्रा में ढेरों आदमी थे। चिता पर माँ को लिटाने के पहले एक बेटे की नजर माँ की कड़ी यानी पैरों में पहनने वाले चांदी के गहने पर पड़ी। यह माँ की सगाई पर तकरीबन ५० बरस पहले मायके वालों ने भेंट की थी। पैरों में चांदी के कड़े नजर आते ही…ताबड़तोड़ `जी` को चिता से उतार कर जमीन पर रखा और फिर जुगत शुरू हुई कड़ी निकालने की। किसी ने पैरों में रस्सी डालकर तो किसी ने हाथ से कड़ी निकालने का असफल प्रयास कियाl तभी कोई सज्जन २ टॉमी ले आएl कड़ी निकालने की इस जोर-आजमाईश में `जी` के पैर छिल चुके थेl पैर छिलने के कारण अंदरूनी सफेद परत नजर आने लगी और पैरों में से सफेद द्रव्य रिसने लगा। आखिरकार टॉमी ने ५ सम्पन्न लड़कों की इच्छा पूरी की। समझ नहीं आ रहा था,जो बच्चे अभी तक विलाप कर रहे थे,उन्हें माँ के जाने का गम था या कड़ी पाने की खुशी।
 परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

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