माँ तू अम्बर…

दुर्गेश राव ‘विहंगम’ 
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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अम्बर-सी,
माँ तू दिनकर
सा दीप जलाती।
धरा से
बालक के तिमिर में,
ममता की
रोशनी फैलाती।
संघर्षमय काँटों
-सी राहों पर पुष्प बरसाती,
जब थक चुके
हौंसलों के पक्षी,
तब माँ विश्वास के पंख लगाती।
घोर निराशा
के तम में,
आशा का तू एक सितारा
खुशियां बिखरे,
करुणा-सा
आँचल तेरा प्यारा।
किस्मत की रेखाओं
में पुरुषार्थ का रंग,
भर कर
ज्ञान-सा अमृत पिलाती।
अमित धैर्य
धारण किए
कष्ट का विष पीती,
तनय के सूखे
सरोवर में खुशी का नीर भरती।
बचपन के क्षण
बीते ममता की छाया में,
जीवन के पथ पर चलना सिखाती॥

परिचय-दुर्गेश राव का साहित्यिक उपनाम ‘विहंगम’ है।१९९३ में ५ जुलाई को मनासा (जिला नीमच, मध्यप्रदेश) के भाटखेड़ी बुजुर्ग में जन्मे दुर्गेश राव का वर्तमान निवास इंदौर(मध्यप्रदेश)में,जबकि स्थाई भाटखेड़ी बुजुर्ग तहसील मनासा है। इनकी शिक्षा-बी.एस-सी. और डी.एलएड है। कार्यक्षेत्र में शिक्षक होकर सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत समाज हित में लेखन करना है। लेखन विधा-काव्य है। विहंगम को हिंदी, अंग्रेजी एवं संस्कृत भाषा का ज्ञान है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-लेखन से समाज सुधार है। प्रेरणा-हिंदी साहित्य के दीपक को जलाए रखना है। रुचि-कविता लिखना और काव्य पाठ करना है। 

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