माँ भारती

प्रभात कुमार दुबे(प्रबुद्ध कश्यप)
देवघर(झारखण्ड)
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स्वतंत्रता दिवस स्पर्धा विशेष………………
नवा रहा हूँ शीश आज,
स्वीकारो माँ भारती।
योद्धाओं के किस्से यहाँ,
हर तरफ है पुकारती।
पापों के अंत करने,
स्वयं प्रभु बन गए थे सारथी।
अग्रजों के विरुद्ध,
झांसी रानी बन गई काल थी।
हर तरफ एक वीर है,
किसका करूँ गुणगान मैं।
याद करूँ चन्द्रशेखर को,
या करूँ खुदीराम मैं।
जहां जन्मा हो भगत,
उस भूमि का क्या बखान करूँ।
जन्म लिया उसी मिट्टी में,
इसका मैं स्वाभिमान करूँ।
अब तक जाने कितने,
धरा पर बलिदान यहां।
माँ के मान पर ना जाने,
हुए कितने कुर्बान यहां।
नवा रहा हूँ शीश आज,
स्वीकारो माँ भारती।
योद्धाओं के किस्से यहाँ,
हर तरफ है पुकारती॥
 परिचय : प्रभात कुमार दुबे(प्रबुद्ध कश्यप)की शिक्षा-बी.ए.(इतिहास-प्रतिष्ठा) तथा डी.एल.एड. जारी हैl आपका जन्म स्थान-बिहार में जमुई स्थित मालवीया नगर (सोहजना) हैl वर्तमान में देवघर(झारखण्ड)में बसे हुए श्री दुबे का अनूठा कार्य हैl आप २००७ से २००९ तक सरकारी स्कूल (बिहार) में रहेl अब जहाँ भी शिक्षक की कमी हो,मुफ्त में स्कूल में जाकर पढ़ाते हैं,वह भी किसी नाम या शोहरत के बिना हीl आपने २०१० में बैंगलोर में निजी संस्थान में कार्य किया,साथ-साथ एक दल में राजनीतिक सक्रियता भी जारी रखीl वर्तमान में श्री दुबे निजी स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैंl आपका लेखन कार्य बचपन से आज तक बिना किसी सहायता के सिर्फ माँ सरस्वती के आशीर्वाद से जारी हैl साहित्य की हर विधा को आज भी सीखने को तत्पर रहने वाले श्री दुबे को पता नहीं है कि,कितना लिखा,कब से लिखा और क्या-क्या लिखा है। लेखन पसन्द होकर आप सभी विधाओं में लिखते हैंl लेखन की उपलब्धि यही है कि,ऑनलाइन साहित्यिक मंच पर भी रचनाओं का प्रकाशन हो रहा हैl

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