माँ से ऊर्जा मिलती है

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई
इंदौर(मध्यप्रदेश)

*****************************************************

मातृ दिवस विशेष………………………

मैं रोज शाम को रोहित का चाय पर इन्तजार करती,लेकिन थक-हारकर कई बार मुझे अकेले ही चाय पीना पड़ती। जब वे कार्यालय से घर देरी से आते तो मैं उनसे अक्सर ये सवाल करती कि-`आज भी आप मांजी से मिलने गए थे ?` इस पर वे सिर्फ `हाँ` में जवाब देकर बात को टाल दिया करते। ये सिलसिला लगातार चार वर्ष से चल रहा था। जबसे हम नए मकान में आए थे,मांजी रोहित के छोटे भाई (देवर )के साथ रहतीं हैं। रोहित रोज कार्यालय से घर आते समय मांजी से मिलने जाते हैं। कभी-कभी तो कार्यालय में अधिक काम की वजह से वे बहुत थके हुए होते,परन्तु फिर भी मांजी से मिलकर ही घर आते।

रोज की तरह आज भी मैं चाय पर उनका इन्तज़ार कर रही थी,और मन-ही-मन सोच रही थी कि,आज रोहित से रोज मांजी से मिलने जाने का कारण पूछूंगी। मैं विचारों में खोई थी कि,इतने में रोहित ने दरवाजे पर दस्तक दी। मैं दरवाजा खोलकर चाय बनाने रसोई में चली गई। बगीचे में बैठै हुए चाय की चुस्कियों के बीच मैंने उनसे पूछ ही लिया-`आप रोज मांजी से मिलने क्यों जाते हैं ? सीधे घर आ जाया करें। कभी दो-तीन दिन में भी मांजी से मिलने जा सकते हैं।` इस पर रोहित ने बड़े ही शांत स्वर में जवाब दिया-`मुझे मेरी माँ से मिलने से ऊर्जा मिलती है।` उनका ये सटीक जवाब सुनकर मैं अवाक रह गई और वातावरण में सन्नाटा छा गया। मैं सोचने लगी पैंतालिस वर्ष की उम्र में एवं आज इस कलियुग में,जहाँ लोग अपनी माँ को वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं,ऐसे में यदि रोहित को अपनी माँ से मिलकर ऊर्जा मिलती है,तो धन्य है वो माँ जिनको ऐसा बेटा मिला है, और कहीं-न-कहीं माँ ने भी बेटे को ऐसे संस्कार दिए हैं कि वो आज उनका खयाल रख रहे हैं। आज मैंने निश्चय किया कि,अब कभी भी रोहित से इस बात के लिए कुछ नहीं पूछूंगी। आज उन्होंने मुझे माँ की ऊर्जा से पुनः परिचय कराया है।

परिचय-डॉ.पूर्णिमा मण्डलोई का जन्म १० जून १९६७ को हुआ है। आपने एम.एस.सी.(प्राणी शास्त्र),एम.ए.(हिन्दी), एम.एड. करने के बाद पी.एच-डी. की उपाधि(शिक्षा) प्राप्त की है। वर्तमान में डॉ.मण्डलोई मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित सुखलिया में निवासरत हैं। आपने १९९२ से शिक्षा विभाग में व्याख्याता के पद पर लगातार अध्यापन कार्य करते हुए विद्यार्थियों को पाठय सहगामी गतिविधियों में मार्गदर्शन देकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई है। विज्ञान विषय पर अनेक कार्यशाला-प्रतियोगिताओं में सहभागिता करके पुरस्कार प्राप्त किए हैं। २०१० में राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान(जबलपुर) एवं मध्यप्रदेश विज्ञान परिषद(भोपाल) द्वारा विज्ञान नवाचार पुरस्कार एवं २५ हजार की राशि से आपको सम्मानित किया गया हैl वर्तमान में आप जिला शिक्षा केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर सहायक परियोजना समन्वयक के रुप में सेवाएं दे रही हैंl कई वर्ष से लेखन कार्य के चलते विद्यालय सहित अन्य तथा शोध संबधी पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं कविता प्रकाशित हो रहे हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य अपने लेखन कार्य से समाज में जन-जन तक अपनी बात को पहुंचाकर परिवर्तन लाना है।

Hits: 167

आपकी प्रतिक्रिया दें.