माँ

पवन कुमार ‘पवन’ 
सीतापुर(उत्तर प्रदेश)

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अगर रूठ जाए कभी तो मनाना।
नहीं दूसरा माँ सदृश है खजाना॥
यही नेह के सिंधु का जल असीमित।
करो लाख कोशिश नहीं पार पाना॥
द्रवित नैन से नीर बहने लगेगा।
कभी पीर अपनी उसे मत सुनाना॥
न जप,तप न तीरथ नहीं देव पूजा।
बड़ा पुण्य है पाँव माँ के दबाना॥
मिली माँ न जिनको बहुत ही अभागे।
कठिन माँ बिना मित्र बचपन बिताना॥
(महाभुजंगप्रयात- १२२× ४)
परिचय-पवन कुमार यादव का साहित्यिक उपनाम ‘पवन’ है। आपकी जन्मतिथि २० जुलाई १९९१ और जन्म स्थान-ग्राम गनेरा,जनप-सीतापुर (उत्तर प्रदेश )है। यहीं पर आपका वर्तमान निवास है। उत्तर प्रदेश के श्री यादव ने स्नातक तक शिक्षा हासिल की है। आपका कार्यक्षेत्र कृषि कार्य करना है। साथ ही कविता लेखन भी करते हैं। लेखन विधा-छंद,गीत,मुक्तक तथा ग़ज़ल है। इनकी रचनाओं का प्रकाशन मासिक पत्रिका सहित अंतरजाल और ई-पत्रिका पर भी हुआ है। प्राप्त सम्मान में आपके नाम साहित्य भूषण सम्मान-२०१७,श्रेष्ठ छंदकार सम्मान,साहित्य गौरव सम्मान एवं सवैया साधक आदि दर्ज हैं। पवन कुमार यादव की लेखनी का उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिन्दी की प्रगति व राष्ट्र सेवा है।

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