माटी का तन

हेमलता पालीवाल ‘हेमा’
उदयपुर (राजस्थान )
****************************************************
मन को छोड़,जो तन में रमते हैं,
वे अपना जीवन,व्यर्थ करते हैं।
यह तन माटी का,माटी हो जाएगा,
सारे भ्रम-सारे दर्प,एक दिन खाख हो जाएगा।
तू व्यर्थ ही,अपने स्वप्न के महल न बना,
अपनी ख्वाहिशों को परवान न चढ़ा।
माटी का कर्ज,माटी बन चुकाना है,
तन को एक दिन,माटी में मिल जाना है।
कर रब से मोहब्बत,उसके दीदार होंगे,
मन को बना सारथी अपना,रब मेहरबाँ होंगे॥
परिचय – हेमलता पालीवाल का साहित्यिक उपनाम – हेमा है। जन्म तिथि -२६ अप्रैल १९६९ तथा जन्म स्थान – उदयपुर है। आप वर्तमान में सेक्टर-१४, उदयपुर (राजस्थान ) में रहती हैं। आपने एम.ए.और बी.एड.की शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र-अध्यापन का है। लेखन विधा-कविता तथा व्यंग्य है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-  साहित्यिक व सामाजिक सेवा है। 

Hits: 112

आपकी प्रतिक्रिया दें.