मातृ दिवस:संतान जिम्मेदारी निभाए 

हेमलता पालीवाल ‘हेमा’
उदयपुर (राजस्थान )
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मातृ दिवस विशेष ………………………
‘मातृ दिवस’ के उपलक्ष्य में सभी मातृ शक्तियों को शुभकामनाएँ। ‘माँ’ की महिमा का वर्णन वेद-पुराणों में भी किया गया। यह अवर्णनीय है। इस धरती पर ‘माँ’ स्वंय ब्रह्म स्वरूप है,वह ब्रह्मा है,क्योंकि वह जन्मदायिनि है। वह विष्णु है,क्योंकि वह पालन-पोषण करती है और वह महादेव बनकर सभी बुराईयों का भी नाश करती है। माँ के चरणों में मुक्ति मानी गई है। हमारे शास्त्रों के अनुसार माँ के चरणों में ही स्वर्ग तथा सारे तीर्थ होते हैं। माँ अपनी संतान की प्रथम गुरू होने के नाते उसमें अच्छे संस्कारों का बीजारोपण करती है। अपने बच्चे के अस्वस्थ होने पर रात-रातभर जागकर उसके स्वस्थ होने की मंगल कामना करती है। माँ अपना हर दायित्व बिना किसी स्वार्थ भावना के निभाती है। उसकी हर सुबह और शाम सिर्फ अपने परिवार की उचित देखभाल करते हुए ही बीत जाती है। और इसमें बीत जाता है उसका यौवन,मिट जाती हैं हसरतें। देखते ही देखते न जाने कब वृद्धा अवस्था दस्तक दे जाती है।

जिंदगी की भागमभाग एवं घुटने के दर्द के बोझ में वह कब शिथिल पड़ जाती है,पता ही नहीं चल पाता है। सवेरे जल्दी उठकर  पानी भरने वाली माँ,अब एक गिलास पानी को भी तरस जाती है। आधुनिक शिक्षा का आवरण ओढ़े लोग अब विवाह उपरांत अपनी माँ का दामन छोड़ जाने में भी नहीं हिचकिचाते हैं। महज एक फोन की औपचारिकता मात्र से ये बेटे अपने कर्त्तव्यों की इतिश्री करते हैं। यह मातृत्व दिवस वास्तव में उनके लिए है, जो बिना किसी दिखावे के अपनी माँ को सच्चा सुख पहुंचाने का प्रयास करते हैं। कितनी बड़ी बात है कि,माँ की ममता व उसका प्यार पाने के लिए तो स्वयं ईश्वर भी लालायित रहते हैं। निश्चित रुप से सच्चा सुख माँ के ही चरणों में मिलता है। दुनिया का हर दरवाजा  भले ही बंद हो जाए,पर माँ का दर हर पल अपनी संतान के लिए खुला रहता है। कितने आश्चर्य की बात है कि,एक संतान को अपनी माँ के प्रति प्रेम व सम्मान को प्रकट करने के लिए किसी एक दिन का सहारा लेना पड़े। एक माँ के लिए कभी ‘संतान-दिवस’ नहीं होता,क्योंकि माँ का हर दिन संतान के लिए ही है। प्रयास कीजिए कि मातृ दिवस महज एक औपचारिक दिवस न हो,माँ के प्रति हमारी जिम्मेदारी उसे शुभकामना देने में नहीं,वरन निभाने में है।
परिचय – हेमलता पालीवाल का साहित्यिक उपनाम – हेमा है। जन्म तिथि -२६ अप्रैल १९६९ तथा जन्म स्थान – उदयपुर है। आप वर्तमान में सेक्टर-१४, उदयपुर (राजस्थान ) में रहती हैं। आपने एम.ए.और बी.एड.की शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र-अध्यापन का है। लेखन विधा-कविता तथा व्यंग्य है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-  साहित्यिक व सामाजिक सेवा है। 

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