मिलन की आस 

डॉ.सुलक्षणा अहलावत
रोहतक(हरियाणा)
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जैसे ये धरा तपती है सूरज की तपन से,
मैं भी तप उठी हूँ तुम्हारी प्रेम अगन से।
जानती हूँ मिलन का ये ख्वाब बेमानी है,
क्यों धरा होकर मिलना चाहा गगन से॥
मैंने दूर क्षितिज पर मिलन होते देखा है,
गगन को भी धरा के लिए रोते देखा है।
एक दिन दुनिया को भी होगा आभास,
सूरज को समंदर में लगाते गोते देखा है॥
बरकरार रहेगी मेरी यह मिलन की प्यास,
जन्म-जन्मांतर दिल में रहेगी यही आस।
बन पार्वती ॐ नमः शिवाय जपा करूँगी,
कभी तो प्रसन्न होंगे मुझ पर शिव कैलाश॥
सुनो अवश्य होगा अपने मिलन का चमत्कार,
सूर्यास्त के समय दिखेगा धरा गगन का प्यार।
‘सुलक्षणा’ बनेगी गवाह उस सुनहरे पल की,
देखो जब ये कायनात भी मानेगी अपनी हार॥
परिचय-डॉ.सुलक्षणा अहलावत की जन्म तिथि १८ नवम्बर १९८१ है। आपका पैतृक गाँव बहलम्बा(जिला रोहतक-राज्य हरियाणा) है। डॉ.अहलावत के साहित्यिक गुरु रणबीरसिंह बड़वासनी (सुप्रसिद्ध हरियाणवी रागनी गायक) हैं। आपकी शिक्षा-बी.एड.,एम.ए.(शिक्षा,अंग्रेजी),एम.फिल.(अंग्रेजी) और पी.एच-डी.(अंग्रेजी) है। बतौर अतिथि प्रवक्ता-अंग्रेजी (शिक्षा विभाग-हरियाणा सरकार) रहने के बाद अब स्थाई रुप से कार्यरत हैं। आपकी उपलब्धि देखें तो अंग्रेजी विषय में आपकी छात्राओं ने मंडल की १२ वीं की परीक्षा में १०० में से १०० अंक प्राप्त किए,ऐसे ही शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े हुए मेवात (हरियाणा) का आपकी मेहनत से अंग्रेजी विषय का परिणाम श्रेष्ठ रहने के साथ ही सत्र २०१६-१७ में कक्षा १२ वीं में राजनीति शास्त्र का परीक्षा परिणाम १०० प्रतिशत रहा है।सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय गतिविधि के रुप में कलम के माध्यम से महिलाओं के मुद्दों को उठाना,पौधारोपण करना,भ्रूण हत्या के विरुद्ध लोगों को जागरूक करना, बेटियों की शिक्षा के लिए प्रयास करना और कैंसर पीड़ित बच्ची के इलाज हेतु धनराशि एकत्रित करना आदि प्रमुख हैं। पठन-पाठन,लेखन और सामाजिक कार्य में आपकी काफी रुचि है। फरवरी २०१४ से हरियाणवी एवं हिंदी भाषा में लिख रही हैं। आपको हरियाणवी रागनी,कविता,ग़ज़ल,शायरी,लेख एवं हाइकू विधा में लिखना भाता है,परंतु हरियाणवी रागनी लिखना सर्वाधिक पसंद है। सामाजिक विषयों पर लिखना आपको आनंद देता है।सम्मान में आपके खाते में शिक्षा दीक्षा शिरोमणि सम्मान-२०१६, हरियाणवी लेखन के लिए हरियाणा सरकार द्वारा सम्मान और उन्नत हरियाणा सम्मान है। साथ ही आपको ‘काव्य मर्मज्ञ सम्मान’,’साहित्य-सोम’ और प्रशस्ति-पत्र सहित करीब ३० अन्य सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है। आपकी रचनाएँ हरियाणा सहित उत्तर प्रदेश,गुजरात,भोपाल और राजस्थान आदि के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। आपकी रचनाओं को वेबसाइट्स और ब्लॉग्स पर भी स्थान मिला है। ‘मेरे बोल मेरी पहचान’ (हिंदी कविता संग्रह)की ई-बुक प्रकाशित हो चुकी है। विशेष रुप से पांचवे दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भी रचना प्रकाशित हो चुकी है। डॉ. अहलावत का निवास चरखी दादरी स्थित प्रेम नगर में है। सामाजिक संस्थाओं से जुड़ाव के अंतर्गत आप एक गैर सरकारी संगठन की संस्थापक होने के साथ ही एक मंच की महिला इकाई की प्रदेश अध्यक्ष और साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं। आपको २०१८ में बहल में `बेस्ट टीचर अवार्ड` सहित श्रीमती गिना देवी काव्य श्री सम्मान और नागपुर में ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले द्वारा `जियो दिल से` अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है।

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