मीरा-सी दीवानी

बोधन राम निषाद ‘राज’ 
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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मीरा-सी दीवानी मैं मस्तानी हो गई,
मैं तो श्याम जी की पटरानी हो गई।
मीरा-सी दीवानी…॥

बनवारी की माया मेरे मन में समाई,
श्याम बरन आँखें हैं आँखें भर आईं।
बाजे रे बाँसुरियाँ धुन सुहानी हो गई,
मीरा-सी दीवानी…॥

पायलियाँ बोले खन-खन बाजे चूड़ियाँ,

नाचूँ मैं झूम-झूम जैसे एक गुड़िया।
श्याम रतन धन मीरा-सी बानी हो गई,
मीरा-सी दीवानी…॥

राधा रमण हरि गोविन्द मुरारी मेरो,
वृन्दाबन धाम के कन्हैया बनवारी मेरो।
राधे श्याम जोड़ी-सी कहानी हो गई,

मीरा-सी दीवानी मैं मस्तानी हो गई॥

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