मुझको हँसाता कौन है

डॉ. रजनी अग्रवाल ‘वाग्देवी रत्ना’
वाराणसी (उत्तरप्रदेश)

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राग छेड़ी सुरमयी मुझको रिझाता कौन है।
गीत अधरों पे सजा मुझको बुलाता कौन है।
मैं पवन का मस्त झोंका बादलों को चूमता,
वादियों में फूल से खुशबू चुराता कौन है।
मुस्कुरा बचपन सलौना खेलता मैं आँगना,
चाँद पानी में दिखा मुझको हँसाता कौन है।
सागरों के तट बनाता नित घरौंदा प्यार का,
ओस हाथों में लिए मुझको भिगोता कौन है।
शोखियाँ,मदहोशियाँ ज़ालिम अदाएँ छल गईं,
दर्दे दिल साथी बना,रिश्ता निभाता कौन है।
अश्क आँखों से छलकते खार सागर हो गए,
हुस्न क़ातिल बन गया मुझको सताता कौन है।
ता-कयामत भूल से न भूल पाएँगे तुझे,
ज़ख्म शूलों से चुभा मुझको रुलाता कौन है।
थक गई हैं धड़कनें साँसें भी’ मद्धिम चल रहीं,
बेवफ़ाई कर यहाँ हमराज़ बनता कौन है।
हो सके ‘रजनी’ खुशी से अश्क पीना सीख ले,
हौंसला रख दे दुआ कब्रों में’ सोता कौन है॥
(एक नज़र यहां भी: काफ़िया-आ, रदीफ़-कौन है, वज़्न- २१२२  २१२२  २१२२  २१२२  २१२)
परिचय-डॉ.रजनी अग्रवाल का साहित्यिक उपनाम `वाग्देवी रत्ना` हैl जन्मतिथि २४ अप्रैल १९५६ तथा जन्मस्थल जयपुर(राजस्थान) है। आपका निवास वाराणसी(उ.प्र.)में है। एम.एड. और पी.एच-डी.(शिक्षा-शास्त्र)शिक्षित डॉ.अग्रवाल का कार्यक्षेत्र- अध्यापिका,लेखिका,कवियित्री सहित समीक्षिका,संपादिका,अभिनेत्री और समाज-सेविका का है। बचपन से लेखन में विशेष रुझान रहा है। चौदह वर्ष की अवस्था में सर्वप्रथम आकाशवाणी जयपुर से आपकी कहानी प्रसारित हुई, तब से लेकर आज तक स्वरचित अनेक नाटक आकाशवाणी व दूरदर्शन से प्रसारित हो चुके हैं। आपने संपादन के अंतर्गत कई पत्रिकाओं में अपनी कलम चलाई है। प्रकाशन में ‘ग़ज़ल एक जिज्ञासा’,’नायाब सखी’ साहित्य संग्रह के अलावा घूँट-घूँट ज़िंदगी(ई-पुस्तक) आपके नाम है। ऐसे ही अनगिनत पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से आपकी रचनाओं का प्रकाशन होता रहा है।उत्कृष्ट लेखनी की वजह से आपको विविध काव्य मंचों पर पुरस्कार व सम्मान में-ज्ञान भास्कार,काव्य -रत्न, काव्य मार्तंड,पंच रत्न,कोहिनूर,काव्य कमल सहित श्रेष्ठ समीक्षिका और पूर्वांचल काशी गौरव-२०१८ सम्मान भी मिला है।

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