मुझ पर रहम खाइए…

विशाल शुक्ल`ॐ`
छिंदवाड़ा(मध्यप्रदेश)
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राधे ने जब,
बाबा की जेल का
चक्कर लगाया,
तो आशा में
पानी फिरते देख
बापू चकरायाl
बोले…
राधे! तुम माँ की तरह
बेशक बाबा पर
ममता लुटाओl
पर मैं उसका भी बाप हूँ
और तुम माँ हो
इस नाते कुछ तो प्रेम
मुझमें लुटाओl
वो बोली…
जाने कौन से मुहुर्त में,
पुलिस ने तुम्हें धरा हैl
अपने ही लोगों से,
तुमने अब तक जेल भरा हैl
भगवान के लिए
मुझ पर रहम खाइएl
अपनी पटरानी होने से
आप ही मुझे बचाइएl
पटरानी बनकर,
ना मैं जवां और ना माँ
रह पाऊँगीl
कानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते,
आपकी तरह जेल में
सड़ जाऊंगीll

परिचय-विशाल शुक्ल का साहित्यिक उपनाम `ॐ` हैl इनकी जन्मतिथि १ सितम्बर १९७६ तथा जन्म स्थान छिंदवाड़ा हैl वर्तमान में निवास छिंदवाड़ा में पातालेश्वर मार्ग पर हैl मध्यप्रदेश के श्री शुक्ल ने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया हुआ है और कार्यक्षेत्र बैंकिंग हैl सामाजिक गतिविधि के तहत साहित्य संवर्धन में सक्रिय हैं। इनकी लेखन विधा-गद्य एवं पद्य भी है। राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में विशाल शुक्ल की रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है।  विभिन्न शीर्ष संस्थाओं से आपको सम्मान भी मिले हैं। विशेष उपलब्धि में पत्र-पत्रिकाओं में लेखन तथा वर्तमान में स्वतंत्र लेखन है। श्री शुक्ल की लेखनी का उद्देश्य-समाज को जागृत करना है। इनकी विशेषज्ञता-साहित्य एवं कला में है।

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