मूल्यवान माताजी

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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मझंले बेटे के यहां उत्सव का माहौल था,घर का हर सदस्य माताजी के आने
की बांट जोह रहा था। बूढ़ी माँ लक्ष्मी, यथा नाम तथा गुण लिए साक्षात देवी स्वरूपा हैं। बूढ़ी मां की सेवा,माँ का घर आगमन,यकीनन बड़े भाग्य की बात होती है। मन में माँ के प्रति श्रृद्धा किसमें नहीं होती,मैं भी रोमांचित था,कि कलयुग में मां की इतनी आवभगत,प्रतीक्षा और स्वागत हेतु आतुर परिवार यदा-कदा ही देखने को मिलता है। मन बार-बार कह रहा था,कि बच्चे अच्छे निकले,संस्कारी हैं जो इस कलयुग में बूढ़ी मां का प्यार, सानिध्य पाने के लिए आतुर हैं। छोटा नगर था,इसलिए सभी एक-दूसरे को जानते-पहचानते थे। परिवार में उत्साह के चर्चे नगरभर में थे,तभी पड़ोसी ने परिवार की उत्सुकता का कारण बताया कि,माताजी के चार बेटे हैं,जो माँ को हर माह अपने हिस्से में बांटते हैं। जैसे ही माताजी को पेंशन राशि मिलती,वह राशि उस बेटे के हिस्से में जाती है। रूपए मिलते ही माताजी से उस बच्चे का मोह समाप्त हो जाता,और माताजी दूसरे बच्चे के लिए मूल्यवान-सी जान पड़ती है। माताजी के उपयोगी होने का सिलसिला २५ से ३० तारीख के बीच में चरम पर होता है। और,जैसे ही अगली तारीख अपना पन्ना बदलती है,माताजी दूसरे बेटे के लिए मूल्यवान हो जाती है।

परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl

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