मेरा दिल खो रहा है

संध्या चतुर्वेदी ‘काव्य संध्या’
अहमदाबाद(गुजरात) 
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देखो बारिश हो रही,मेरा दिल खो रहा है,
कोई कुछ तो मुझे समझाए,मुझे क्या हो रहा है।

तेरी आँखों में मेरा दिल खो गया है,
मेरा चैन जा रहा है,मुझे प्यार हो रहा है।
कोई कुछ तो मुझे समझाये,मुझे क्या हो रहा है…ll

परी हो तुम या हो कोई महारानी,
लगता है हो तुम मेरे दिल की रानी।

बारिश हो रही है,मेरा दिल खो गया है,
कोई कुछ तो बताओ,मुझे क्या हो गया है।

चाँद से रोशन चेहरा,मेरे दिल को भा गया है,
तेरे होंठों की लाली,पर दिल खो रहा है।

देखो बारिश हो रही है,मेरा दिल खो रहा हैl
कोई कुछ तो मुझे समझाओ,मुझे क्या हो रहा है…ll

परिचय : संध्या चतुर्वेदी का साहित्यिक नाम काव्य संध्या है। आपने बी.ए. की पढ़ाई की है। कार्यक्षेत्र में व्यवसाय (बीमा सलाहकार)करती हैं। २४ अगस्त १९८० को मथुरा में जन्मीं संध्या चतुर्वेदी का स्थाई निवास मथुरा(उत्तर प्रदेश)में है। फिलहाल अहमदाबादस्थित बोपल (गुजरात)में बसी हुई हैं। कई अखबारों में आपकी रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। लेखन ही आपका शौक है। लेखन विधा-कविता, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहा, धनाक्षरी, कह मुकरिया,तांका,लघु कथा और पसंदीदा विषय पर स्वतंत्र लेखन है। संध्या जी की लेखनी का उद्देश्य समाज के लिए जागरुक भूमिका निभाना है। आपको लेखन के लिए कुछ सम्मान भी मिल चुके हैं|

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