मेरा प्यारा हिन्दुस्तान

नीरज सिंह राजपूत
बलिया (उत्तर प्रदेश)
****************************************** 

कोई भारत कहता है,कोई हिन्दुस्तां कहता है,
कोई गरीब समझता है,कोई महान कहता है।
यही वो देश है जहाँ हर धर्म एकसाथ रहता है,
मेरे इस देश का हिफाज़त खुद हिमालय करता है॥

यहाँ आशियाना भी मिल जाए,परायों के मकानों में,
यहां बस प्यार बिकता है,सबके दिलों की दुकानों में।
मुझको फक्र है कि मैं ऐसे हिन्दुस्तान में रहता हूं,
जहा श्री कृष्ण बसते थे,ग्वालों के ठिकानों में॥

हम चर्च में कभी आशा की मोमबत्ती जलाते हैं,
कभी गुरूद्वारे की दहलीज पर माथा टेक आते हैं।
हर ईद की सेवईयां यहां हम हिंदू भी खाते हैं,
यहां होली के रंगों में सब धर्म गुलाबी भी हो जाते हैं॥

मैं भारत देश का वासी हूं,और मैं यह गर्व से कहता हूं,
मैं इस देश की हरियाली,फूलों की कलियों में रहता हूं।
बहुत हो गया ज़ुबा बंद कर लो हमारा धर्म पूछने वालों,
मैं अल्लाह का बन्दा हूँ,श्रीराम की गलियों में रहता हूं॥

किसी को हीर प्यारी है,किसी को रांझा प्यारा है,
इंसानियत की नजरों से तो सारा संसार प्यारा है।
पूरी दुनिया की मुहब्बत को तुम मेरे सामने रख दो,
फिर भी मैं कहूंगा बस मेरा हिन्दुस्तान प्यारा है॥

यहाँ की मिट्टी भी प्यारी है,और आसमां भी प्यारा है,
हम बुलबुले हैं इसके,ये गुलसितां हमारा है।
कहने को तो तीन रंगों का धागा है मगर,
वो तिरंगा तो मुझे मेरी जान से प्यारा है॥

परिचय-नीरज सिंह राजपूत की जन्मतिथि-१४ फरवरी १९९९ तथा जन्म स्थान-बलिया (उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान में आप ग्राम ज़ीराबस्ती(बलिया)में रहते हैं। नीरज सिंह फिलहाल विद्यालय स्तर पर अध्ययनरत हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,लेख और कहानी है। आपके लेखन का उद्देश्य-मन के भावों का प्रदर्शन करना है। 

Hits: 24

आपकी प्रतिक्रिया दें.