मेरी नन्हीं-सी परी

प्रकृति दोशी
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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पानी की बोतल हाथ में थमाकर
खाने के डब्बे को बस्ते में घुसाकर,
उसे मैं टाई पहनाया करती थी।

लाल रिबन लगा के उसकी चोटियाँ सजाया करती थी,
प्यार से गले लगा के उसे स्कूल तक छोड़ने जाया करती थी।

वो अंदर जाने लगती थी तो मुस्कुराकर हाथ हिलाया करती थी,
वापस आने पर उसे आईसक्रीम खिलाया करती थी।

लाल-नीली चमकीली उसे स्कर्ट दिलाया करती थी,
मेरी नन्हीं-सी परी से मैं बहुत प्यार करती थी।

वो हँसते-हँसते न जाने कितने दर्द छुपाया करती थी
कई दिनों से गालों से आँसूओं के दाग मिटाया करती थी,
मैं इस निर्दयी दुनिया से अनजान हुआ करती थी।

पड़ी हुई थी वो सड़क के किनारे
जहां वो कभी खेला करती थी,
उसी स्कूल ड्रेस में दो चोटियाँ बांधे
जिन्हें मैं प्यार से सजाया करती थी।

पड़ी है मेरी बच्ची मेरी गोद में बेजान
इसी गोद में लिटा के मैं उसे लोरी सुनाया करती थी,
इस दानवों की दुनिया को मैं क्यों समझा करती थी।

शर्म नहीं आयी जिसे मेरी बच्ची की चीखों पे
मेरी परी के आंसुओं पर जिसने दया नहीं की,
मैं ही बेवकूफ थी
क्यों लोगों को इंसान समझा करती थी।

इसलिए ही परी को
मैं दुनिया में लाने से डरती थी…॥

परिचय – प्रकृति दोशी की जन्म तारीख ४ जून १९९९ और जन्म स्थान जबलपुर(मध्यप्रदेश) है। वर्तमान में भोपाल(मध्यप्रदेश) में निवासरत और स्थाई पता जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ है। शिक्षा बी.एस-सी.( इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) है। कार्यक्षेत्र में फिलहाल शिक्षारत है।

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