मेरी माँ भारत माँ

दयाशंकर वर्मा ‘भारतीय’
कानपुर(उत्तरप्रदेश)
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हे! मातृभूमि तुमने करके मुझे बड़ा,इतना उपकार किया,
मेरी भूख,प्यास और सिर ढंकने को,ये संसार दिया,
भूख मिटाने को मेरी,तुमने ये खेतों का विस्तार दिया।
प्यास मिटाने को तुमने दी है ये पावन नदियाँ,
तेरे आगोश में है ये इतिहास, इतिहास नहीं क्या हैं ये सदियाँ।
देकर तूने ये ऋतुएं मुझपे किए हैं कितने उपकार,
इसके बिना जीवन का अस्तित्व ही नहीं,बिना इसके यह संसार।
देकर तुमने मुझको खाने को,खुद अपने सीने पर हल चलवाए हैं,
अगर करती है उपकार हमपे माता,तो बच्चों ने भी इसकी रक्षा की
खातिर सिर कटवाए हैं।
इसकी रक्षा की खातिर कितने देशभक्तों ने दी हैं कुर्बानियाँ,
देगा क्या यह संसार तुम्हें,जब वह केवल बना है कहानियाँ।
और अगर देश के स्वाभिमान पर कोई आँख उठाएगा,
है भारतमाता की कसम हमें,वह अपनी जान गँवाएगा।
देश की रक्षा की खातिर,मैं सबसे लड़ जाऊँगा,
वक्त पड़ेगा तो मैं सौ-सौ गोलियाँ दुश्मन की,अपने सीने पर खाऊँगा।
पड़ेगी जरुरत मेरे लहू की ऐ माता,मैं कतरा-कतरा खून बहा दूंगा,
देश की आन-बान और शान में,मैं हँसकर अपना शीश कटा दूँगा।
कहीं अगर मेरी जरुरत इस देश की आहुति में पड़ जाएगी,
चाहे कितने हो जाए अनाथ,विधवा.. मुझको उन पर दया न आएगी।
सुभाष,भगत,शेखर जैसा मैं बन सकूँ,तो उनकी राह पर चलकर दिखलाऊँगा।
उन्होंने भी देश को आजाद कराया था,मैं बन्दूकों से देश को आजाद कराऊँगा॥
परिचय-दयाशंकर वर्मा का साहित्यिक उपनाम-दया ‘भारतीय’ है। कानपुर स्थित सिविल लाईन्स निवासी श्री वर्मा की जन्मतिथि १९ फरवरी १९८८ एवं जन्मस्थान लखीमपुर खीरी (उ.प्र.)है। आपका स्थाई पता-गोला गोकरन नाथ, जिला लखीमपुर खीरी है। इनकी शिक्षा सैन्य अध्ययन में स्नातकोत्तर तथा बी.एड. है। आपका कार्य क्षेत्र-शोध कार्य का है। इनके लिए लेखन की प्रेरणा पुंज-राष्ट्रीय समस्याएं हैं। दया ‘भारतीय’ की लेखनी का उद्देश्य साहित्य के माध्यम से समाज में देशप्रेम की भावना को जगाना है,साथ ही इसे वरीयता देना है। इनकी लेखन विधा-कविता और लेख है। आप ब्लॉग पर भी लिखते हैं। 

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