मेरे जीवनसाथी

अमित मिश्रा 
कटिहार (बिहार)

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तुम ही जीवन हो मेरा,
तुम ही जीवन का सार हो
तुम बिन मैं कुछ भी नहीं,
तुम जीने का आधार हो।
मैं तेरी माँग का सिन्दूर,
तुम मेरी साँसों की डोर हो
मैं तेरे गले का मंगल सूत्र,
तुम मेरी धड़कन का शोर हो।
लिए हैं हमनें सात फ़ेरे,
जीवनभर साथ निभाने के
तुमसे ही है सुबह मेरी,
तुम ही चंदा चकोर हो।
तुम आई मेरे जीवन में,
इससे बड़ा कुछ भी नहीं
संग चले है संग रहेंगे,
तुम बिन जीवन में ना हो कोई और।
ये मेरे जीवनसाथी,
तुम साँसें,तुम धड़कन
तुम मंज़िल,तुम दर्पण,
तुम ही मेरे जीवन की डोर हो॥
परिचय-अमित मिश्रा वर्तमान में जयपुर विमानतल के समीप सीआईएसएफ इकाई(प्रताप नगर)में रहते हैंl श्री मिश्रा बिहार राज्य के शहर बरसोई से होकर बी.ए.(ऑनर्स)तक शिक्षित हैं शिक्षा- अबादपुर एवं कटिहार में हुई है। आपकी जन्मतिथि-७ जनवरी १९८९ तथा जन्म स्थान-आबादपुर,जिला-कटिहार(बिहार) है। साहित्यिक उपनाम- कवि अमित मिश्रा है। आपका कार्यक्षेत्र-सीआईएसएफ ही है। आपको हिन्दी लेखन का शौक है। श्री मिश्रा की लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल,कविता सहित कथा,लघुकथा एवं मुक्तक हैl आपके लेखन का उद्देश्य मन के भावों को उकेरना और हिन्दी को राजभाषा से अंतराष्ट्रीय भाषा बनाना है।

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